रेलवे का बड़ा प्लान, 39% कैपेक्स खर्च और ‘कवच’ का विस्तार
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2026-27 में अपने पूंजीगत खर्च की रफ्तार तेज कर दी है। जुलाई 2026 तक रेलवे अपने 2,93,030 करोड़ रुपये के वार्षिक कैपेक्स बजट में से 1,14,973 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। यह कुल आवंटन का करीब 39 प्रतिशत है। सरकार के मुताबिक, इस खर्च के साथ सुरक्षा, आधुनिक तकनीक और रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
लोकसभा में एक लिखित जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे की विभिन्न परियोजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रेलवे में सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए बजट लगातार बढ़ाया गया है। वर्ष 2013-14 में सुरक्षा मद में 39,200 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 में इसके लिए 1,20,389 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
रेल सुरक्षा के लिहाज से स्वदेशी ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम ‘कवच’ के विस्तार को भी तेजी दी गई है। 31 जुलाई 2026 तक कवच 4.0 को 2,633 रूट किलोमीटर पर चालू किया जा चुका है। इसमें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त रेल कॉरिडोर भी शामिल हैं।
रेल मंत्री के अनुसार, कवच 4.0 के नए संस्करण में कई तकनीकी सुधार किए गए हैं। इसमें ट्रेन की लोकेशन अधिक सटीक तरीके से निर्धारित करने, बड़े यार्ड में बेहतर सिग्नल जानकारी उपलब्ध कराने और स्टेशन-टू-स्टेशन संचार को मजबूत बनाने जैसी सुविधाएं शामिल हैं। सिस्टम को ऑप्टिकल फाइबर और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से भी बेहतर तरीके से जोड़ा गया है।
ट्रैक किनारे कवच लगाने का काम भी बड़े पैमाने पर चल रहा है। अब तक 21,794 रूट किलोमीटर पर इस प्रणाली के लिए काम शुरू किया जा चुका है। इसके दायरे में गोल्डन क्वाड्रिलेटरल, गोल्डन डायगोनल, हाई-डेंसिटी नेटवर्क समेत कई महत्वपूर्ण रेलखंड शामिल हैं। वहीं, 6,290 लोकोमोटिव में कवच लगाया जा चुका है। इसके अलावा 7,190 अन्य लोकोमोटिव और 1,200 ईएमयू-मेमू रेक को भी इस सुरक्षा प्रणाली से लैस करने की प्रक्रिया जारी है।
कवच परियोजना पर जून 2026 तक 3,875 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। वित्त वर्ष 2026-27 में इसके लिए 2,066 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य इस स्वदेशी तकनीक को अधिक से अधिक रेल मार्गों और ट्रेनों तक पहुंचाना है।
रेलवे केवल सुरक्षा के मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि ट्रेनों की गति बढ़ाने के लिए भी नेटवर्क को अपग्रेड कर रहा है। वर्ष 2014 में महज 5,036 किलोमीटर रेल मार्ग ऐसे थे, जहां 130 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक गति से ट्रेनें चल सकती थीं। वर्ष 2026 में ऐसे रेल मार्गों की लंबाई बढ़कर 24,173 किलोमीटर हो गई है।
वर्तमान में रेलवे नेटवर्क का करीब 81 प्रतिशत हिस्सा 110 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक की रफ्तार वाली ट्रेनों के संचालन के लिए सक्षम बताया गया है। 2014 में यह आंकड़ा करीब 40 प्रतिशत था। मिशन रफ्तार के तहत नई दिल्ली-मुंबई और नई दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर को 160 किलोमीटर प्रति घंटा तक की गति के लिए अपग्रेड किया जा रहा है।
रेल नेटवर्क के विस्तार की रफ्तार भी बढ़ी है। वर्ष 2014 से 2026 के बीच 36,429 किलोमीटर नई रेल लाइनों का निर्माण किया गया। इसका औसत करीब 8.32 किलोमीटर प्रतिदिन रहा, जबकि 2009-14 के दौरान यह गति 4.2 किलोमीटर प्रतिदिन थी।
रेल मंत्री ने बताया कि 1 अप्रैल 2026 तक रेलवे की 514 बुनियादी ढांचा परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में चल रही थीं। इनमें 169 नई लाइन, 29 गेज परिवर्तन और 316 दोहरीकरण परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के तहत करीब 40,000 किलोमीटर रेल मार्ग को कवर किया जा रहा है और इनकी अनुमानित लागत लगभग 8.31 लाख करोड़ रुपये है।
इन परियोजनाओं में अब तक 12,583 किलोमीटर रेल मार्ग का काम पूरा हो चुका है और इस पर 3.05 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इससे आने वाले समय में रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने, यात्रा का समय घटने और माल परिवहन को बेहतर बनाने की उम्मीद है।
रेलवे कर्मचारियों के कौशल विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। रेलवे के विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों के जरिए हर साल करीब 6 लाख कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। आधुनिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में डिजिटल तकनीक, लॉजिस्टिक्स और आधुनिक माल परिवहन संचालन जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।