‘राख’ में बिना डायलॉग छाईं सोनाली बेंद्रे, बताया सबसे कठिन अनुभव
Mumbai : ओटीटी पर रिलीज हुई क्राइम थ्रिलर सीरीज ‘राख’ को दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। कहानी और प्रस्तुति के साथ-साथ अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे के अभिनय की भी खूब सराहना हो रही है। इस सीरीज में उन्होंने एक ऐसा किरदार निभाया है, जिसमें संवाद बेहद सीमित हैं और भावनाओं को चेहरे के हावभाव और खामोशी के जरिए व्यक्त किया गया है।
सोनाली बेंद्रे ने बातचीत के दौरान बताया कि इस किरदार ने उन्हें अभिनय के एक अलग अनुभव से रूबरू कराया। उनके अनुसार, मजबूत कहानी और किरदार की गहराई ने अभिनय को सहज बनाया, लेकिन बिना डायलॉग के भावनाएं दर्शाना अपने आप में बड़ी चुनौती थी।
उन्होंने कहा कि संवाद कम होने से याद रखने की परेशानी जरूर नहीं रही, लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि काम आसान हो गया। कलाकार को हर भावना को भीतर से महसूस कर उसे आंखों, चेहरे और छोटे-छोटे हावभाव के जरिए दर्शकों तक पहुंचाना पड़ता है। ऐसे किरदार में शब्दों का सहारा नहीं होता, इसलिए अभिनय की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
अभिनेत्री ने यह भी स्वीकार किया कि किरदार की भावनात्मक गहराई का असर उनके निजी जीवन तक महसूस हुआ। कई बार शूटिंग खत्म होने के बाद भी वह उस किरदार की मानसिक स्थिति से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाती थीं। उनके मुताबिक, कुछ दृश्य और भावनाएं लंबे समय तक मन में बनी रहती थीं, जो कभी-कभी थकाने वाला अनुभव भी बन जाता था।
‘राख’ 1970 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित एक क्राइम थ्रिलर सीरीज है। सीरीज में रहस्य, भावनाएं और अपराध की कहानी को एक अलग अंदाज में पेश किया गया है। दर्शकों के बीच इसकी कहानी और कलाकारों के अभिनय को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
लंबे अंतराल के बाद पर्दे पर वापसी कर रहीं सोनाली बेंद्रे के लिए यह किरदार खास माना जा रहा है। उनका मानना है कि अभिनय केवल संवाद बोलने तक सीमित नहीं होता, बल्कि कई बार खामोशी भी शब्दों से ज्यादा प्रभावशाली साबित होती है।