विद्यार्थी लक्ष्य बनाए और उसे हासिल करने के लिए परिश्रम करे : जांगिड़
बाड़मेर । जांगिड़ पंचायत के सानिध्य में ऋषि अंगिरा फाउंडेशन द्वारा 29 वा शिक्षा भूषण सम्मान समारोह का आयोजन रविवार को स्थानीय रॉय कालोनी स्थित ऋषि अंगिरा सभागार में सेवानिवृत पुलिस महानिदेशक डॉ सांगा राम जांगिड़ के मुख्य आतिथ्य में किया गया। समारोह में जांगिड़ पंचायत के अध्यक्ष प्रभुदयाल धीर, जांगिड़ ब्राह्मण जिला सभा के अध्यक्ष निंबाराम जांगिड़, आईआरएस अधिकारी रमेश मांकड़, वैदिक संस्कार एवं शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. गणेशीलाल सुथार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अरविंद जांगिड़,समाजसेवी भंवरलाल आसदेव पाली, शिक्षाविद गेमरा राम जांगिड़, प्रांतीय महामंत्री संस्कार भारती जोधपुर पूनमचंद सुथार,युवा नेता कालू जांगिड़, विश्वकर्मा विकास संस्थान जोधपुर के अध्यक्ष गणेश बिन्जानी, जीवाराम जायलवाल, जयकिशन सुथार, भलाराम चोयल व निंबाराम मांडन बतौर विशिष्ट अतिथि के रूप मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा ऋषि अंगिरा व भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया।
तत्पश्चात फाउंडेशन द्वारा अतिथियों का दुप्पटा ओढ़ाकर व स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत अभिनंदन किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि सेवानिवृत पुलिस महानिदेशक डॉ सांगा राम जांगिड़ ने सम्मानित होने वाली प्रतिभाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सफलता का एक ही मूलमंत्र है कि विद्यार्थी पहले अपना लक्ष्य निर्धारित करे और उसे हासिल करने में कड़ा परिश्रम करे। इसके अतिरिक्त सफलता का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने फाउंडेशन को आर्थिक सहयोग करने वालों भामाशाहों का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आपका सहयोग प्रतिभाओं का हौसला बढ़ाने का काम कर रहा है। जांगिड़ ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में माता पिता की अहम भूमिका होती है, ऐसे में माता पिता अपने बच्चों से यह जरूर पूछे कि वह क्या बनना चाहता है, उसके क्या सपने है। मातृ शक्ति भी बच्चों का पूरा ध्यान रखे। उन्होंने कहा कि समाज को आगे बढ़ना है तो एकरूपता आवश्यक है। आईआरएस अधिकारी रमेश मांकड़ ने कहा कि आज शिक्षा के प्रति ललक बढ़ रही है और जागरूकता आ रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए किसी भी विद्यार्थी को पैसों की कमी नहीं आने देंगे।
शिक्षाविद पूनमचंद सुथार ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि देश सेवा में अपना जीवन न्यौछावर करने वाले हमारे सैनिक, वैज्ञानिक, शिक्षक ही हमारे रियल हीरो है। हमें इनसे प्रेरणा लेनी है न कि रील हीरो को फॉलो करना है। उन्होंने पुराणिक काल से लेकर आधुनिक युग तक की यात्रा में शिक्षा का महत्व बताया। सुथार ने कहा कि यह सम्मान प्रेरणा का माध्यम है, जरूरतमंद विद्यार्थियों को सहयोग कर उनका जीवन निर्माण करे। सुथार ने मोबाइल एडिक्शन को लेकर भी अपनी बात रखी । गणेश बिन्जानी ने कहा कि यह सम्मान केवल प्रतीक है, मेहनत आपको करनी है। उन्होंने मोबाइल की लत को खतरनाक बताते हुए उस पर नियंत्रण रखने की बात कही। प्रो. गणेश लाल सुथार ने कहा कि समाज को शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों को समाज और उनके ऋषियों से रुबरु करवाया। भलाराम चोयल ने कहा कि आगे बढ़ना है तो शिक्षा पर केंद्रित होना होगा। निंबाराम मांडन ने कहा कि शिक्षा केवल नंबर लाने और पास होने तक सीमित नहीं है। यह सतत प्रक्रिया है, इससे मानव का सर्वांगीण विकास होता है। समारोह को प्रभुदयाल धीर, अरविंद जांगिड़, राजेंद्र बरड़वा, निंबाराम जांगिड़ सहित अन्य अतिथियों व वक्ताओं ने संबोधित किया और प्रतिभाओं का मार्गदर्शन करते हुए उनकी उपलब्धियों पर शुभकामनाएं दी। इससे पूर्व स्वागत भाषण देते हुए फाउंडेशन प्रमुख हरीश जांगिड़ मारुडी ने संस्थान का आय व्यय का ब्यौरा रखा और छात्रवृत्तियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समाज के शैक्षणिक उत्थान के लिए 1992 से प्रयास कर रहे है। हमे खुशी है कि बच्चे अव्वल आ रहे है और मेहनत के बलबूते आगे बढ़ रहे है। उन्होंने फाउंडेशन का सहयोग करने वालों भामाशाहों का आभार प्रकट किया। समाज की प्रतिभा सोनिया जांगिड़ व कविता द्वारा शिक्षा को लेकर अपना उद्बोधन दिया। कार्यकम में मंच संचालन डॉ हुकमाराम सुथार, नरेश पालेचा, आईदान राम, अरुण कुमार द्वारा किया गया वही फाउंडेशन संयोजक डॉ हरीश जांगिड़ द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। सभी आंगुतकों का तिलक कर स्वागत किया गया।
आईएएस जोगाराम ने भेजा ऑडियो संदेश :
बाड़मेर के मूल निवासी आईएएस अधिकारी जोगाराम जांगिड़ ने ऑडियो संदेश भेजकर प्रतिभाओं की हौसला अफजाई की। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि हम हमेशा विद्यार्थियों के साथ है। आज विश्व, समाज, देश परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में समाज को ध्यान रखना है। समाज युवाओं को दिशा दे और उनका मार्गदर्शन करे। पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों को समाज में बनाए रखना है। उन्होंने परम्पराओं को सहजने और उपलब्धि के बाद जमीं से जुड़े रहने की बात कही तभी समाज, देश के प्रति जिम्मेदारी निभा पाएंगे। जांगिड़ ने कहा कि सफलता का आधार अनुशासन और चरित्र है। बदलते परिवेश में नए अवसर आ रहे है। विद्यार्थी पढ़ाई के साथ साथ कौशल विकास पर ध्यान दे। दूरदर्शीता रखते हुए विजन तय करे ताकि एक दिशा में आगे बढ़ सके। उन्होंने भविष्य को ध्यान में रखते हुए चिंतन मनन की बात कही। जांगिड़ ने प्रतिभाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सब एक रहे और सहयोग करे।
200 प्रतिभाओं का हुआ सम्मान :
समारोह में शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली मारवाड़ की करीब 200 प्रतिभाओं और नवचयनितो का प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। समारोह में बाड़मेर, जैसलमेर, पाली, जालोर, जोधपुर सहित पूरे मारवाड़ से प्रतिभाएं कार्यक्रम में शामिल हुई।
भामाशाहों का हुआ बहुमान :
फाउंडेशन को आर्थिक सहयोग देने वाले 70 से अधिक भामाशाहों का दुप्पटा ओढ़ाकर, प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह भेंट कर बहुमान किया गया। फाउंडेशन द्वारा समाज के शैक्षणिक उत्थान के लिए सहयोग करने वालों भामाशाहों का आभार प्रकट किया गया।
यह रहे मौजूद :
कार्यक्रम में पूर्व सरपंच नाथूराम जांगिड़,राणाराम ओढ़ाना,मोतीलाल जांगिड़, दिनेश कुमार,दीपाराम जांगिड़, मदनलाल धीर,एडवोकेट पन्नालाल जांगिड़, मुल्तान लूंजा, घनश्याम मांडन, अगरा राम लूंजा, बाबूलाल कुलरिया,ओमप्रकाश, तुलसा राम, समेला राम, शंभू मांकड़, भूराराम, गणेश मुंगेरिया, ईश्वर जांगिड़, हरखाराम सुथार, गोपाल बरड़वा, ब्रजभूषण जांगिड़, लक्ष्मी जांगिड़, डॉ पुष्पा, पूनम, नाजीदेवी, सोनिया जांगिड़ सहित बड़ी संख्या में मारवाड़ क्षेत्र के विद्यार्थी, समाजबंधु व मातृशक्ति मौजूद रही ।