उड़ता तीर !
एक पंत कई काज।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का अधिवेशन 24 फरवरी से 26 फरवरी तक रायपुर छत्तीसगढ़ में संपन्न हुआ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसमें भाग लिया पर इसके साथ-साथ कई काम भी निपटा दिए जैसे छत्तीसगढ़ के कोयला ब्लॉक के मामले पर 23 फरवरी को उन्होंने मुख्यमंत्री बघेल से चर्चा की इसी दिन में प्रवासी राजस्थानियो से भी मिले। 3 दिन मुख्यमंत्री के साथ उनका निजी स्टाफ भी था इसलिए महत्वपूर्ण फाइलों पर उन्होंने रायपुर में बैठकर ही फैसला लिया।
बराबरी का सपना चूर।
कांग्रेस आलाकमान की इच्छा कांग्रेस का अधिवेशन राजस्थान में ही कराने की थी परंतु छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आलाकमान को विश्वास दिलाया कि राजस्थान से बेहतर व्यवस्था करके बताऊंगा पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, बराबरी दिखाना तो छोड़ें, छत्तीसगढ़ सामान्य व्यवस्थाएं भी तरीके से नहीं कर पाया वहां आए कई डेलिगेट्स ने नाराजगी भी जताई। कई वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि रायपुर में यह कराने का फैसला ठीक नहीं रहा मेहमान नवाजी और मेजबानी में तो सबने राजस्थान से सबको नीचे माना।
ताकत दिखाने की तैयारी।
भाजपा नेत्री और पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे अपने जन्मदिन से पूर्व चार मार्च को सालासर में अपना शक्ति प्रदर्शन करेगी क्योंकि उन्होंने अपने सभी समर्थक नेताओं को वहां पहुंचने को कहा है बीकानेर संभाग में वसुंधरा का अच्छा प्रभाव माना जाता है इसलिए सारे नेता हाजिरी में आएंगे, नेताओं की संख्या देखकर आलाकमान को वसुंधरा के बारे में वापस सोचना पड़ सकता है।
एक तीर से दो निशाने।
भाजपा में एक तरफ तो वसुंधरा राजे सालासर में अपने जन्मदिन के बहाने ताकत दिखाने की तैयारी कर रही है वहीं दूसरी ओर प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने इसी दिन विधानसभा घेराव की घोषणा कर दी है इस योजना के पीछे पूर्व संगठन महासचिव प्रकाश चंद्र का हाथ माना जा रहा है जो सतीश पूनिया को मजबूत करना चाहते हैं वही उनका दूसरा निशाना संगठन महासचिव चंद्रशेखर हैं जिन को हटाकर प्रकाश चंद को लाने की वापस तैयारी चल रही है। फिर वसुंधरा राजे और प्रकाश चंद के बीच 36 का आंकड़ा था ही।
पिटारा फिर खुलेगा ।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रायपुर सम्मेलन से पूर्व पार्टी पदाधिकारियों की काफी भर्तियां कर दी है फिर भी कुछ बाकी है जिन्हें मार्च के प्रथम पखवाड़े तक भर दिया जाएगा राजनीतिक नियुक्तियों का पिटारा भी खुलने को तैयार है यह काम सोम मंगल को अथवा होली बाद होगा।
रंग उतरेंगे होली बाद ।
होली के बाद भाजपा और कांग्रेस में कईयों के चेहरे बेनकाब होने लग जाएंगे क्योंकि वसुंधरा राजे के साथ 4 मार्च को आने वाले पार्टी के निशाने पर रहेंगे और उनका टिकट आलाकमान काटेगा इसलिए वे नया रास्ता बनाएंगे वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के भी कई नेता टाटा करने की तैयारी में है क्योंकि भाजपा चाहती है कि जिन को आना है वह कर्नाटक चुनाव से पहले यानी 14 अप्रैल से पहले अपनी जिम्मेदारी संभाल ले।
घमासान तेज।
राजस्थान में इस वर्ष दिसंबर के प्रथम सप्ताह में विधानसभा चुनाव निश्चित हैं इस को मध्य नजर रखते हुए दोनों ही पार्टी में संघर्ष तेज हो गया है केंद्र सरकार पूर्वी कैनाल, रिफाइनरी ओटीएस स्कीम और अन्य प्रोजेक्ट पर सरकार को घेरने लगी है। दूसरी ओर संजीवनी प्रकरण पर मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह की नींद उड़ा दी है फ्री स्कीम को लेकर भी दोनों सरकारों में तनातनी होने लगी है चुनाव पहले और कई मामले भी सामने आएंगे और आपसी तकरार बढ़ेगी। सरकार की फ्री योजनाओं को भी केंद्र सरकार गंभीरता से ले रही है कुल मिलाकर संघर्ष के तेज होने की संभावना है।
तीरंदाज