बीमारियां बांट रहा है भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड
पिछले कुछ सालों से अनेक रिपोर्टों में यह स्वीकार किया गया कि भूजल में जहरीली धातुओं की
मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई है, इसके बावजूद शुद्ध पानी के लिए कोई ठोस
कदम नहीं उठाया गया जो बेहद चिंताजनक है। यह भी स्वीकार किया है कि रसायनों या
धातुओं का मानव शरीर और स्वास्थ्य पर बहुत गंभीर विषाक्त प्रभाव पड़ता है और स्वास्थ्य के
लिए खतरा पैदा होता है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हाल ही में भूजल में आर्सेनिक
और फ्लोराइड की मौजूदगी से जुड़े एक मामले में 24 राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों को
नोटिस जारी किया है। हरित पैनल ने कहा कि इन धातुओं या रसायनों की मौजूदगी 'बहुत
गंभीर' है और इसके लिए 'तत्काल निवारक और सुरक्षात्मक कदम' उठाने की जरूरत है। इस
सम्बन्ध में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण ने एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें उसने जिलों और राज्यों में
आर्सेनिक और फ्लोराइड की मौजूदगी की बात मानी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 25 राज्यों के
230 जिलों के कुछ हिस्सों में भूजल में आर्सेनिक पाया गया, जबकि 27 राज्यों के 469 जिलों
के कुछ हिस्सों में फ्लोराइड पाया गया।
इससे पूर्व गत वर्ष भारत सरकार ने संसद में स्वीकार किया है कि आज हम जो पानी पी रहे हैं वह जहर बन
गया है। सरकार ने राज्यसभा में जो आंकड़े दिए थे वो न सिर्फ चौकाने वाले हैं बल्कि डराने वाले भी हैं। जहां
भूजल में जहरीली धातुओं की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई है। आंकड़ों के अनुसार देश के 25
राज्यों के 230 जिलों के कुछ हिस्सों में भूजल में आर्सेनिक का स्तर 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक
है। 27 राज्यों के 469 जिलों के कुछ हिस्सों में भूजल में लौह तत्व 1 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक है। 21
राज्यों में 176 जिले ऐसे हैं जहां भूजल में लेड का स्तर कुछ हिस्सों में 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक
है। वहीँ 11 राज्यों के 29 जिलों के कुछ हिस्सों में भूजल में कैडमियम का स्तर 0.003 मिलीग्राम प्रति लीटर
से अधिक पाया गया।
हमारे देश के भूजल में आर्सेनिक, फ्लोराइड, नाईट्रेट, लोहा, कैडमियम, क्रोमियम, तांबा, निकल, सीसा,
जस्ता व पारा जैसी भारी धातु का मिश्रण तेजी के साथ घुलता जा रहा है। जिससे जलजनित बीमारियां
हमारे जीवन के लिए खतरा बन गई हैं। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की माने तो विभिन्न वैज्ञानिक
अध्ययनों और जल गुणवत्ता की निगरानी के दौरान केंद्रीय भूमि जल बोर्ड द्वारा तैयार भूमि जल गुणवत्ता
के आंकड़े देश के विभिन्न राज्यों के भागों के अलग-अलग हिस्सों में भूमि जल संदूषण की पुष्टि कर रहे हैं।
हालत यह हो गई है की लोग धीमे जहर वाले पानी को पीने के लिए विवश हैं। मंत्रालय का दावा है कि केंद्रीय
भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर इस चुनौती से निपटने के लिए संदूषित भूजल की समस्या और विशुद्ध
जल के सेवन से प्रभावित नागरिकों के उपचार के लिए जागरूकता और जलजनित बीमारियों की रोकथाम
के लिए योजनाएं भी चलाई जा रही हैं।
जल शक्ति मंत्रालय के एक दस्तावेज के अनुसार देश की 80 प्रतिशत से अधिक आबादी को इसका पानी
भूजल से मिलता है। दुनिया में उपलब्ध कुल जल में मात्र 0.6 फीसदी जल ही पीने योग्य है। यह पानी समुद्रों
नदियों, तालाबों, झीलों और अन्य जल निकायों में मौजूद है। मानव सभ्यता के विकास के साथ हमारे
जलस्रोत जबरदस्त प्रदूषण के शिकार हो रहे हैं। इनमें जल प्रदूषण मुख्य कारक है। जल प्रदूषण के कारण
विभिन्न जलस्रोतों में जीवन के लिए जहर रूपी खतरनाक रसायनों के मिश्रण का घोल बन रहा है। हमारे
देश में शुद्ध जल की प्राप्ति दूभर होती जा रही है। प्रदूषित के बाद संदूषित जल ने हमारे स्वास्थ्य और
पाचन तंत्र को बिगाड़ कर रख दिया है। पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय की एकीकृत प्रबंधन सूचना प्रणाली
द्वारा दिये आँकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 4 करोड़ ग्रामीण पीने के लिये धातु-संदूषित जल का
उपयोग करते हैं। जल में पाए जाने वाले प्रमुख भारी धातु फ्लोराइड, आर्सेनिक और नाइट्रेट हैं। आर्सेनिक
संदूषण में बंगाल और राजस्थान शीर्ष पर हैं। जल जीवन का आवश्यक तत्व है। वनस्पति से लेकर जीव
जन्तु अपने पोषक तत्वों की प्राप्ति जल के माध्यम से करते हैं। जीवन पानी पर निर्भर करता है। मनुष्य एवं
प्राणियों के लिए पीने के पानी के स्त्रोत नदियाँ, सरिताएँ, झीलें, नलकूप आदि हैं। मानव पानी का उपयोग
स्नान, धुलाई, उद्योग, सिंचाई, नेविगेशन, निर्माण कार्य आदि के लिए करता है यह हम सब जानते है। जल
का दूषित होना मनुष्य के स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है ।
-बाल मुकुन्द ओझा