चूरू: सम्मान के साथ सह-अस्तित्व ही स्त्री विमर्श का आधार
चूरू। राजकीय लोहिया महाविद्यालय के हिन्दी विभाग द्वारा शनिवार को स्त्री विमर्श के विविध आयाम विषय पर सेमीनार आयोजित किया गया। अध्यक्षता करते हुए गुंजन चौहान ने कहा कि स्त्री विमर्श आज साहित्य की केन्द्रीय धारा तो है ही इस समय की महती आवश्यकता भी है। सदियों से सम्मान, संवेदना और अधिकार के लिए संघर्षरत आधी आबादी को आज भी सम्मान के साथ सह-जीवन व सह-अस्तित्व के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। वन्दना सैनी ने स्त्री विमर्श के विविध आयाम के साथ प्रभा खेतान के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वन्दना शर्मा ने मैत्रेयी पुष्पा और पायल शर्मा ने निर्मला पुतुल के स्त्रीवादी लेखन को रेखांकित करते हुए अपने शोध-पत्र में स्त्री विमर्श की विविध समस्याओं तथा विसंगतियों, विडम्बनाओं व विद्रुपताओं को उजागर करते हुए स्त्री विमर्श के विविध आयामों को स्रोताओं के सामने प्रस्तुत किया। पत्र-वाचन के पश्चात समीक्षक के रूप में प्रतिज्ञा जाखड़ व भरत सिंह राठौड़ ने प्रस्तुत पत्रों की समीक्षा की। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ मंजू शर्मा ने कहा कि स्त्री विमर्श एक सांस्कृतिक, सामाजिक आन्दोलन है और यह स्त्री की अस्मिता की वास्तविक तलाश है। डॉ विभा पारीक ने अनामिका और निर्मला पुतुल की कविताओं के माध्यम से स्त्री विमर्श के सूक्ष्म पहलुओं को स्रोताओं के सामने रखा। उम्मेद सिंह गोठवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर डॉ ममता मीणा, डॉ पूजा प्रजापत भी उपस्थित रही। संचालन श्रीकृष्ण ने किया। इस अवसर पर साहिबा, अनिशा, यशवेन्द्र सोनी, प्रीतेश सहित भारी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।