सांस्कृतिक विविधता भारत की अन्तर्राष्ट्रीय धरोहर है
बाल मुकुन्द ओझा
संवाद और विकास के लिए सांस्कृतिक विविधता का विश्व दिवस 21 मई को मनाया जाता है। यूनेस्को द्वारा इस दिन को मनाने का उद्देश्य विभिन्न देशों की संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों को समझना तथा उनका सम्मान करना है। हर देश की अपनी अलग पहचान होती है—कहीं भाषा अलग है, कहीं पहनावा, कहीं खान-पान और कहीं जीवन जीने का तरीका। यही विविधताएँ विश्व को सुंदर और समृद्ध बनाती हैं।
दुनिया के सभी देशों की अपनी अलग भाषा, अलग परिधान, अलग खानपान, अलग पहचान और अलग-अलग सांस्कृतिक विशेषताएं हैं। भारत की संस्कृति एवं सभ्यता विश्व में सबसे प्राचीनतम और महान है। भारत विश्व का सातवां सबसे बड़ा देश है, आबादी की दृष्टि से इसका दूसरा स्थान है। संसदीय लोकतंत्र में अपनी गहन आस्था और प्रतिबद्धता के लिए विख्यात भारत सांस्कृतिक विविधता में एकता का अनूठा संगम है। आधुनिक भारत के निर्माताओं की बौद्धिक सूझबूझ एवं प्रयासों का ही परिणाम है कि स्वतंत्रता के बाद हम अपने सांस्कृतिक स्वरुप की रक्षा करने में सफल रहे। भारत की सफलता का मंत्र उसकी सांस्कृतिक विविधता है और यही विविधता हमारा वह आधार है जो हमें अद्वितीय बनाता है। इस देश में हमें राज्यों और क्षेत्रों, पंथों, भाषाओं, संस्कृतियों, जीवन शैलियों जैसी कई बातों का सम्मिश्रण देखने को मिलता है। हम बहुत अलग हैं, लेकिन फिर भी एक हैं, एकजुट हैं। हमें अपने देश की मिट्टी, पानी, विविधता, समग्रता संस्कृति, परंपरा और अध्यात्म पर गर्व है।
भारत विभिन्न संस्कृतियों का देश है जो समूचे विश्व में अपनी एक अलग पहचान रखता है। अलग-अलग संस्कृति और भाषाएं होते हुए भी हम सभी एक सूत्र में बंधे हुए हैं। भारत की संस्कृति विविधता की अनूठी और विलक्षण परिचायक है। इतनी विविधताओं के बावजूद भी भारतीय संस्कृति में एकता की झलक दिखती है। भारतीय संस्कृति न सिर्फ ऐतिहासिक विरासतों का संग्रहण है, बल्कि यह अनेक परंपराओं, विश्वासों और विचारों का संकलन है। नोबल पुरस्कार विजेता डा. अमर्त्य सेन के अनुसार आधुनिक भारतीय संस्कृति इसकी ऐतिहासिक परंपराओं का जटिल सम्मिश्रण है, जिस पर शताब्दियों से शासन करने वाले औपनेविशक शासन तथा वर्तमान पश्चिमी सभ्यता का व्यापक प्रभाव पड़ा है।
भारतीय संस्कृति विश्वभर में प्रसिद्ध है। हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परम्पराओं से पूरी दुनिया प्रभावित है। भारत त्योहारों और मेलों के लिए विश्व विख्यात है जो आमजन को कोई न कोई सन्देश देते है। यहाँ भिन्न भिन्न प्रकार के त्योहार मनाए जाते है। पंजाब में बैसाखी, हिमाचल में फुल्लैच, राजस्थान में तीज और गणगौर, हरियाणा में सांझी, उत्तर प्रदेश में लठमार होली, केरला में ओनम, तमिल नाड में पोंगाल और असम में बिहू, काफी उत्साह से मनाए जाते हैं। भारत में विभिन्न धर्मों का पालन करने वाले मुख्यतः हिन्दू, मुसलमान, सिख और ईसाई धर्म के लोग एकता और विविधता के साथ जीवन यापन करते हैं। भारत के विभिन्न भागों में खाना पकाने का ढंग उनकी संस्कृति के मुताबिक अलग-अलग है। भारत में हर बीस किमी पर भाषा, पहनावा और बोलने का ढंग बदल जाता है। इसके अतिरिक्त भारत के विभिन्न भागों में लगभग 545 भाषाएँ व्यवहार में लाई जाती हैं। इन विभिन्न भाषाओं के कारण भारत में विविधता दर्शित होती है। वर्तमान में भारत के संविधान द्वारा 22 भाषाओं को मान्यता प्रदान की गई है। ये भाषाएँ हैं हिन्दी, बांग्ला, पंजाबी, गुजराती, मराठी, उड़िया, उर्दू, सिन्धी, असमिया, कश्मीरी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली, संस्कृत, डोगरी, संथाली, बोड़ों व मैथिली।
भारत के संविधान में देश को संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न और धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने का जो संकल्प किया गया उसके अनुसार देश के सभी धर्मों को अपनी धार्मिक आजादी को बनाये रखने का अधिकार दिया गया है। अल्पसंख्यक समुदाय को सुरक्षा के लिए अनेक प्रावधान किये गये हैं और सरकार किसी धर्म विशेष के मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। देश में सभी धर्मों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराने की संवैधानिक गारंटी सुनिश्चित की गयी है। इसके बावजूद संविधान में इस बात का ध्यान रखा गया है कि धर्म के नाम पर किसी के साथ किसी भी तरह की ज्यादती, जुल्म और मनमानी न हो और न उसके मूल अधिकारों का हनन हो। समय पर इसके लिए कई सकारात्मक कदम उठाये गये हैं, यह भी ध्यान रखा गया है कि किसी भी तरह से सांप्रदायिक सौहार्द और सद्भाव का वातावरण बिगड़ने न पाये।