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झुलसाती गर्मी के साथ आंधी-बारिश और लू का चौतरफा अटैक

झुलसाती गर्मी के साथ आंधी-बारिश और लू का चौतरफा अटैक

-बाल मुकुंद ओझा
यह मौसम गर्मी का है। इस दौरान जलवायु परिवर्तन के अज़ब गज़ब नज़ारों से देश और दुनिया को को दो दो हाथ करने पड़ रहे है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी जारी कर कहा है कि देश के बड़े हिस्से में भीषण लू चल रही है, और दिल्ली और उत्तर भारत में रहने वाले लोगों को आने वाले दिनों में भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में लोगों को बहुत संभल कर रहना पड़ेगा, क्‍योंकि जरा-सी लापरवाही सेहत बिगाड़ सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, छत्तीसगढ़ और कोंकण एवं गोवा के कुछ हिस्सों में 22 मई तक लू की स्थिति रहने की संभावना है। उत्तर और मध्य भारत में अधिकतम तापमान तेजी से बढ़ रहा है।. मौसम की यह मार स्वास्थ्य के लिए खतरा और जानलेवा भी हो सकती है। उत्तर भारत में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। कई स्थानों पर पारा 45 से 48 डिग्री तक पहुँच गया है।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत समेत पूरी दुनिया में सुपर अलनीनो दस्तक दे रहा है। पूरी दुनिया का मौसम चक्र गड़बड़ा रहा है। समुद्रों का तापमान बेहद गर्म हो गया है तो वहीं, भारत में नौतपा से पहले ही बारिश हो रही है। यहां तक कि मानसून भी पहले आ रहा है। भारत की बात करे तो तेज और झुलसाने वाली ग र्मी, लू के साथ आंधी, तूफ़ान, बारिश और उड़ने वाले रेतीले गुब्बारों ने जीना दुश्वार कर दिया है। मई की झुलसाती दोपहर और रात में भी झुलसा देने वाली गर्मी के बीच मौसम अब अचानक करवट लेता दिख रहा है। देश के कई हिस्सों में लोग इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। कहीं आसमान से आग बरस रही है तो कहीं तेज आंधी और बिजली लोगों की चिंता बढ़ा रही है। रेतीले टीलों से आच्छादित राजस्थान सहित उत्तर भारत के अनेक प्रदेशों में लू का चलन आम बात है। गर्मी और लू के साथ धूल भरे गुबार उड़ने शुरू हो गए है। धूल भरे गुब्बारे यानि मौसमी आंधियां तब आती हैं जब तेज हवाएँ ज़मीन से बड़ी मात्रा में रेत और धूल के कण उठाती हैं तथा उन्हें लंबी दूरी तक ले जाती हैं। इन्हें राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों में जन जीवन की सामान्य घटनाएं भी कह सकते है। गर्मी के मौसम में धूल भरी आंधी और लू चलनी शुरू हो जाती है। जिसके कारण हवाओं में धूल के कण मिलकर लोगों के नाक और मुंह में जाते हैं। इससे लोगों को धूल-मिट्टी से एलर्जी होना सामान्य बात है। मौसम विभाग ने लू यानि हीटवेव का अलर्ट जारी कर दिया है। चिकित्सकों के मुताबिक धूल भरी आंधी और गुबार से नाक, नासिका, एलर्जी व रेस्पीरेटरी इंफेक्शन होने का आशंका बढ़ जाती है। धूल के कण सांस के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। इस कारण दमा व अस्थमा एवं दमा के रोगियों को भारी तकलीफ होती है। यही नहीं धूल के कण आंखों में चले जाने से आँखों की बीमारी का खतरा मंडराता है। गर्मी और गर्म हवाएं शरीर में अक्सर ऐसा असर डालती हैं, जिस वजह से जानलेवा स्थिति उत्पन्न हो जाती है। लू लगना भी इन्हीं स्थितियों में से एक है। धूप, गर्मी और गर्म हवा से शरीर को बचाकर ही हम इस स्थिति से बच सकते हैं। साल-दर-साल लू लगने से मरने वालों के आंकड़े में इजाफा होता ही जा रहा है। इसलिए, खुद को लू से बचाने के लिए लू लगना क्या होता है और इससे संबंधित अन्य सभी जानकारियों के बारे में पता होनी जरूरी है, क्योंकि, इलाज से बेहतर हमेशा बचाव होता है।
लू लगने पर अगर तुरंत उपचार न मिले, तो मृत्यु या स्थायी विकलांगता भी हो सकती है। बड़े बुजुर्ग कहते है गर्मी के दिनों में हल्का व शीघ्र पचने वाला भोजन करना चाहिए। चिकित्सक कहते है लू से बचने के लिए बाहर जाते समय खाली पेट नहीं जाना चाहिए। बार-बार पानी पीना चाहिए ताकि शरीर में जल की कमी नहीं होने पाए। पानी में नींबू व नमक मिलाकर दिन में दो-तीन बार पीते रहने से लू नहीं लगती। गर्मी के दौरान नरम, मुलायम, सूती कपड़े पहनना चाहिए जिससे हवा और कपड़े शरीर के पसीने को सोखते रहते हैं। प्याज का सेवन भी अधिक करना चाहिए एवं बाहर जाते समय कटे प्याज को जेब में रखना चाहिए। गर्मी में खूब तरल पदार्थ का सेवन करें। घर से बाहर निकल रहे हैं, तो अपने साथ पानी की बॉटल रखें। प्रतिदिन 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं। नारियल पानी, फलों से तैयार जूस पीना भी फायदेमंद होगा। दिन के समय खासकर 12 बजे से लेकर 3 बजे दिन तक घर से निकलने से बचें। धूप में बाहर बिना काम के ना घूमें। बहुत जरूरी काम से बाहर जाना पड़े तो छाता, टोपी, चश्मा, स्कार्फ पहनकर ही निकलें। घर आते ही ठंडा पानी पीने से बचें। इससे आपको सर्द-गर्म लग सकता है। सर्दी, जुकाम, बुखार भी हो सकता है। हल्का, पौष्टिक और आसानी से पचने वाला भोजन करें। उन मौसमी फलों का सेवन करें, जिसमें पानी की मात्रा अधिक होती है।

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