साइबर स्वच्छता अवेयरनेस समय की मांग, ई-वेस्ट के वैज्ञानिक निष्पादन और रिसाइक्लिंग पर जोर : वी. श्रीनिवास
जयपुर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने साइबर स्वच्छता के प्रति सरकारी और गैरसरकारी संस्थाओं को आगे आकर व्यापक स्तर पर अवेयरनेस कार्यक्रम संचालित करने पर जोर देते हुए कहा कि आज डिजिटल सुरक्षा समय की मांग है। ब्रिक्स सस्टेनेबल लाइफस्टाइल सप्ताह, 2026 के दौरान ई-वेस्ट पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक एवं आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से सोना, चांदी सहित अन्य मूल्यवान धातुओं की रिकवरी की जा सकती है। इससे न केवल प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण संभव है, बल्कि ई-वेस्ट को उपयोगी संसाधन में परिवर्तित कर सर्कुलर इकोनॉमी को भी मजबूती मिलती है। कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्य सचिव, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की अध्यक्ष अपर्णा अरोरा, पर्यावरण सचिव श्रीमती शैलजा देवल एवं आरएसपीसीबी के सदस्य सचिव कपिल चंद्रवाल ने प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के व्यवस्थित संग्रहण, वैज्ञानिक निस्तारण एवं अधिकाधिक रिसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करने के लिए अवेयरनेस कार्यक्रम के तहत आठ ई-वेस्ट कलेक्शन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्य सचिव ने ई-वेस्ट रिसाइक्लर्स द्वारा प्रदर्शित रिसाइक्लिंग प्रक्रिया एवं विभिन्न तकनीकी व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। मुख्य सचिव ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने ई-वेस्ट के उचित संग्रहण एवं वैज्ञानिक रिसाइक्लिंग के लिए आमजन, उद्योगों और संबंधित संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आमजन को अब अपनी लाइफस्टाइल में पर्यावरण संरक्षण को शामिल करना होगा ताकि बेहतर पर्यावरण के साथ बेहतर स्वास्थ्य की कल्पना साकार हो सके। उन्होंने ब्रिक्स सस्टेनेबल लाइफस्टाइल सप्ताह, 2026 के दौरान एक नवंबर से राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा प्रतिदिन आयोजित कार्यक्रमों और इन कार्यक्रमों में जनभागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि इस आयोजन में राजस्थान समूचे देश में अग्रणी प्रदेश बन गया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव, खान एवं पेट्रोलियम विभाग तथा अध्यक्ष राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल अपर्णा अरोरा ने ई-वेस्ट के प्रभावी प्रबंधन में जनभागीदारी, उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी तथा उत्पादकों एवं रिसाइक्लर्स की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल अपशिष्ट का निस्तारण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपशिष्ट को संसाधन के रूप में पुनः उपयोग में लाने की दिशा में भी ठोस प्रयास आवश्यक हैं। इस दौरान उन्होंने मंडल द्वारा किए जा रहे सतत् प्रयासों की विस्तार से जानकारी दी। अध्यक्ष अपर्णा अरोरा ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण मण्डल द्वारा एक नवंबर से आयोजित सप्ताह के दौरान 5 नवंबर तक 59 हजार कार्यक्रमों का आयोजन कर 7 लाख 60 हजार से अधिक प्रदेषवासियों को इस कार्यक्रम से जोड़ा है। उन्होंने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण के प्रति मण्डल की सजगता को इसी से समझा जा सकता है कि इस दौरान करीब 27 विभागों को जोड़ा गया। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव श्री कपिल चन्द्रावल ने मंडल द्वारा आयोजित की जा रही विभिन्न गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि सप्ताहभर प्रदेश में सस्टेनेबल लाइफस्टाइल, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधनों के संरक्षण, स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। तकनीकी सत्र में ई-वेस्ट प्रबंधन एवं रिसाइक्लिंग के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों द्वारा चर्चा के दौरान ई-वेस्ट के औपचारिक संग्रहण तंत्र को मजबूत बनाने में आमनागरिकों की भूमिका, जागरूकता एवं जवाबदेही के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अनुपयोगी होने पर उन्हें सामान्य कचरे में फेंकने के बजाय अधिकृत कलेक्शन सेंटर एवं रिसाइक्लर्स तक पहुंचाना आवश्यक है। ई-वेस्ट के प्रभावी संग्रहण, पृथक्करण, परिवहन, वैज्ञानिक रिसाइक्लिंग एवं संसाधनों के पुनः उपयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान मिशन लाइफ के अंतर्गत पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने तथा जिम्मेदार उपभोग एवं अपशिष्ट प्रबंधन की शपथ भी दिलाई गई पर्यावरण सचिव शैलजा देवल, माइंस विभाग की विशिष्ट सचिव नम्रता वृष्णि ने भी विचार व्यक्त किए। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के मुख्य पर्यावरण अभियंता प्रेमालाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।