राजस्थान विधानसभा आम चनु ाव तिथि में संषोधन की मांग
सीकर। सीकर विकास मचं ने भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त से राजस्थान विधानसभा आम चुनाव 2023 जिसके कार्यक्रम कि अधिकारिक घोषणा नो अक्टूबर को की जो कि 23 नवम्बर को देव प्रबोधिनी एकादषी यानी दवे उठनी ग्यारस है में पूनर्विचार कर संषाध्ेान हेतु। इस वर्ष 29 जून को दवे शयनी एकादशी से बहुसख्ंयक सनातनी परिवारों में विवाह-शादियों सहित सभी मांगलिक कार्यों पर धार्मिक मान्यतानुसार (दवे शयन) चौमासा में प्रतिबंध रहता है, जो अब देव प्रबोधिनी एकादषी यानी देव उठनी ग्यारस दिनांक 23 नवम्बर से 146 दिनों लगभग पांच माह बाद पुन: शुरू हांगे े। राजस्थान में दवे प्रबोधिनी एकादषी को बहुत बड़ा उत्सव एवं अबूझ (जिसके लिए मूहुर्त की आवष्यकता ना हो) सावा होता है, इस दिन लगभग 50 से 60 हजार शादियां होने का अनुमान है जिसमें हजारों सरकारी अधिकारी, कर्मचारियों सहित हलवाई, टेंट व्यवसाई, केटरर्स, शादी करवाने वाले पंडितजी, लवाजमा, बेण्डवाले, व्यापारी, भात भरने वाले, बाराती, विवाह समारोह में शरीक होने वाले मेहमानों सहित लाखो मतदाता प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होने का अनुमान है। ऐसे ही विवाह स्थल जहां पर या आसपास मतदान केन्द्र अवस्थित होंगे व छोटी बड़ी लाखों गाड़ीया भी जो विवाह समाराहे में भी बुक होगी व प्रषासन द्वारा निर्वाचन कार्यों हेतु अधिगृहित की जायेगी प्रभावित होना तय ह।ै इसी दिनांक 23.11.2023 को विष्व प्रसिद्ध खाटूष्यामजी (सीकर) का पाटोत्सव एवं पुस्कर (अजमेर) में मले ा होता है। एक और निर्वाचन आयोग स्वीप जैसे कार्यक्रम चलाकर मतदातोओं को अधिकाधिक मतदान हेतु प्रेरित/जागृत करता है, वहीं यदि दवे उठनी ग्यारस जैसे महत्वपूर्ण दिन मतदान दिवस रखा जायेगा तो मतदान प्रतिषत प्रभावित होगा। अत: इस पर पुनर्विचार कर उपरोक्त दिनांक में संषाध्े ान किया जावे।