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ट्विन बेटों संग दिव्यांका का पहला गणपति उत्सव, बोलीं- अब दिमाग 160 की स्पीड से चलता है

ट्विन बेटों संग दिव्यांका का पहला गणपति उत्सव, बोलीं- अब दिमाग 160 की स्पीड से चलता है

मुंबई। दिव्यांका त्रिपाठी के लिए इस बार गणपति उत्सव सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि परिवार की नई शुरुआत के बीच आया एक बेहद भावुक और खास मौका था। हाल ही में दो जुड़वा बेटों की मां बनीं अभिनेत्री ने पति विवेक दहिया के साथ घर पर बप्पा का स्वागत किया। दोनों नन्हे बच्चों के आने के बाद यह उनके परिवार का पहला गणपति उत्सव था, इसलिए हर तैयारी में बच्चों की मौजूदगी और उनकी पसंद जैसी मासूमियत को शामिल किया गया।

अभिनेत्री ने बताया कि इस बार उन्होंने किसी बड़े या भव्य आयोजन की योजना नहीं बनाई। बच्चों के अभी बहुत छोटे होने की वजह से परिवार ने सादगी के साथ बप्पा का स्वागत करने का फैसला किया। उनका मानना था कि घर में गणपति बप्पा का आगमन हो और बच्चों को भी उनका आशीर्वाद मिले, यही इस उत्सव की सबसे बड़ी खुशी थी।

घर की सजावट भी इस बार सामान्य त्योहारों से अलग नजर आई। दिव्यांका ने ट्विन बेटों को ध्यान में रखते हुए ब्लू थीम चुनी। डेकोरेशन में पर्ल्स के साथ रैबिट्स और मशरूम जैसे क्यूट एलिमेंट्स शामिल किए गए। कुल मिलाकर घर का माहौल बच्चों की मासूम दुनिया से प्रेरित दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि इस बार सजावट से लेकर गणपति उत्सव की पूरी थीम तक, लगभग हर चीज में उनके दोनों बेटों का ख्याल रखा गया।

हालांकि, दो छोटे बच्चों की देखभाल के साथ त्योहार मनाना आसान नहीं रहा। दिव्यांका के मुताबिक अब घर का कोई भी काम करने से पहले बच्चों के आराम और सुविधा को प्राथमिकता देनी पड़ती है। त्योहार की तैयारी हो, घर में आने वाले मेहमान हों या रोजमर्रा के काम, हर स्थिति में सबसे पहले यही सोचना पड़ता है कि बच्चों को किसी तरह की परेशानी न हो।

उन्होंने अपनी बदली हुई दिनचर्या को मजेदार अंदाज में बयान करते हुए कहा कि पहले अगर उनका दिमाग 60 की रफ्तार से काम करता था, तो अब उसे 160 की स्पीड से चलाना पड़ता है। बच्चों की देखभाल, उनके आराम का ध्यान, मेहमानों की व्यवस्था और गणपति उत्सव की तैयारियां, सभी जिम्मेदारियों को एक साथ संभालना पड़ता है। उन्होंने माना कि इस नए दौर में मेहनत जरूर बढ़ी है, लेकिन वह और विवेक दोनों इस पूरे अनुभव को खुलकर जी और एंजॉय कर रहे हैं।

इस बार परिवार ने गणपति उत्सव को बड़ी पार्टी या भारी-भरकम सेलिब्रेशन बनाने के बजाय अपनों के साथ सुकून से समय बिताने को प्राथमिकता दी। दिव्यांका ने घर पर ही मोदक तैयार किए। इसके साथ रोजमर्रा का सादा और घरेलू खाना भी बनाया गया, जिसमें सब्जी, दाल और रोटी शामिल रही। इस तरह त्योहार में पारंपरिक स्वाद और घर जैसा अपनापन दोनों देखने को मिला।

मां बनने के बाद उनकी जिंदगी में आए बदलाव पर दिव्यांका ने कहा कि अब उनकी सोच और प्राथमिकताएं काफी बदल चुकी हैं। पहले वह और विवेक अपने काम और अपनी दिनचर्या पर ज्यादा ध्यान देते थे, लेकिन अब घर के दो नए सदस्यों ने उनकी दुनिया का केंद्र बदल दिया है। दोनों बच्चे इतने छोटे हैं कि सोते समय भी माता-पिता बार-बार उनकी ओर देखते हैं और यह सुनिश्चित करते रहते हैं कि वे ठीक और आराम से हैं।

दिव्यांका और विवेक के लिए यह नया पेरेंटहुड फेज जिम्मेदारियों से भरा जरूर है, लेकिन खुशियों से भी उतना ही भरपूर है। ट्विन बेटों के साथ उनका पहला गणपति उत्सव इसी बदलती जिंदगी की खूबसूरत तस्वीर बन गया, जहां बड़े जश्न से ज्यादा अहमियत परिवार, बच्चों की मुस्कान, सादगी और बप्पा के आशीर्वाद को दी गई।

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