कांगो में इबोला का कहर बढ़ा, 139 लोगों की मौत
New Dehli : डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों की ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश में अब तक 689 पुष्ट मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि 139 लोगों की जान जा चुकी है। हालात को देखते हुए स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार निगरानी और नियंत्रण के प्रयासों में जुटी हुई हैं।
हाल ही में 17 नए संक्रमित मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें पांच मौतें भी शामिल हैं। सभी नए मामले पूर्वी इटुरी प्रांत से सामने आए हैं। यह संक्रमण इबोला वायरस के बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैल रहा है, जिसने इटुरी, नॉर्थ किवू और साउथ किवू सहित कई क्षेत्रों को प्रभावित किया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभी भी बड़ी संख्या में संदिग्ध मामलों की जांच जारी है। रिपोर्ट में 168 संदिग्ध मामलों का उल्लेख किया गया है, जिनमें से 64 लोगों की मौत हो चुकी है। इससे संक्रमण की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
संक्रमण रोकने के प्रयासों के बीच कई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई क्षेत्रों में लोग मृत्यु के बाद जांच के लिए नमूने देने से हिचकिचा रहे हैं। इसके अलावा इबोला उपचार केंद्रों की क्षमता सीमित है और आवश्यक चिकित्सा सामग्री की भी कमी बनी हुई है। निगरानी और रिपोर्टिंग व्यवस्था में कमजोरियां भी संक्रमण नियंत्रण को प्रभावित कर रही हैं।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त की रिपोर्ट के अनुसार इटुरी क्षेत्र के एक विस्थापित शिविर में भी इबोला से दो लोगों की मौत हुई है। इससे राहत शिविरों और संवेदनशील आबादी वाले क्षेत्रों में चिंता और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक वर्तमान प्रकोप इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि बुंडिबुग्यो प्रजाति के इबोला वायरस के लिए अभी तक कोई स्वीकृत टीका या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। हालांकि संभावित वैक्सीन और दवाओं पर शोध और परीक्षण जारी हैं।
गौरतलब है कि डीआरसी में इबोला का यह 17वां प्रकोप है। वर्ष 1976 में पहली बार इस वायरस की पहचान हुई थी। उस समय कांगो के एक गांव के पास स्थित इबोला नदी के नाम पर इस बीमारी का नाम रखा गया था। वर्तमान संकट ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र पहले से ही मानवीय चुनौतियों, असुरक्षा और बड़े पैमाने पर लोगों के आवागमन जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है।