योग और देशी नुस्खों से करे कोरोना का मुकाबला
देश में दिन प्रतिदिन कोरोना के मामलों में हो रही बढ़ोत्तरी ने सरकार के साथ साथ देशवासियों की चिंता
बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नए वेरिएंट को तेजी से फैलने की क्षमता वाला बताया है। वैज्ञानिकों
और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम आदमी को सावधान किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक 10 अप्रैल
और 11 अप्रैल को पूरे देश में कोविड को लेकर सार्वजनिक और निजी दोनों अस्पतालों की आपातकालीन
तैयारियों का आकलन करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी मॉक ड्रिल होगी। इस अवसर पर राज्यों के स्वास्थ्य
मंत्री अस्पतालों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। इसमें अस्पतालों में पर्याप्त बेड की उपलब्धता
शामिल है। साथ ही दवाओं का आवश्यक स्टॉक सुनिश्चित करने की बात कही है। राज्यों को कोविड इंडिया
पोर्टल पर अपने कोविड डेटा को नियमित रूप से अपडेट करने के लिए भी कहा गया है। वैज्ञानिकों का कहना
है कि इससे घबराने की जरूरत नहीं है, हालांकि अलर्ट रहना जरूरी है। लोग बाहर निकलते समय मास्क
जरूर बनने और कोरोना से जुड़े बचावों के नियमों का पालन करें। भीड़ में जानें पर सोशल डिस्टेंसिंग का
ध्यान रखें।
कोरोना महामारी ने हमें योग, साधना, देशी चिकित्सा और प्रकृति से मित्रता का सन्देश दिया है। एक्सपर्ट
का मानना है, योग, साधना, व्यायाम और हमारी रसोई में मिलने वाले मसालों से उपचार जैसी प्राकृतिक
और देशी चिकित्सा अपनाकर हम अपनी स्वयं की और परिवार की सुरक्षा कर सकते है।
कोरोना संकट में प्रकृति और ऋषि मुनियों द्वारा अपनायी जाने वाली देशी चिकित्सा ने हमारा
ध्यान खिंचा है। सच तो यह भी है दादी नानी के नुस्खों ने कोरोना बीमारी के दौरान हमें
जीवनदान दिया है। स्वस्थ रखने के लिए नानी-दादी के नुस्खे आज भी महत्वपूर्ण हैं। वे हमारे
रोजमर्रा के जीवन से जुड़े हैं। अगर उनका पालन किया जाए तो बड़ी से बड़ी बीमारी का
मुकाबला किया जा सकता है। कोरोना में सर्दी, जुकाम, खांसी, गले में खराश आम बात है। दादी
नानी के नुस्खों ने इनका उपचार भी हमें बताया है। ये नुस्खे इतने ज्यादा कारगर हैं कि डॉक्टर
और मेडिकल साइंस भी उन्हें मानने से मना नहीं करते हैं। हल्दी वाला दूध हो या नमक मिले
गरम पानी के गरारे कोरोना के जुकाम और गले दर्द में दोनों ही कारगर इलाज है। अदरक को
पानी में उबालकर और फिर शहद के साथ खाया जाए तो यह कफ, गले में खराश और गला
खराब होने की दिक्कत से छुटकारा दिला सकती है। अदरक को शहद के साथ खाने से गले में
होने वाली सूजन और जलन में भी राहत मिलती है। इसी भांति अजवायन, लोंग, काली मिर्च,
तुलसी गिलोय, मलेठीयुक्त पान, शहद, दालचीनी आदि के नुस्खे भी संजीवनी साबित हुए है।
उल्टा लेटकर ऑक्सीजन प्राप्त करने के नुस्खे को एलोपेथी की मान्यता मिली है। इन नुस्खों का
उपयोग कर लाखो लोग कोरोना के प्रारंभिक लक्षणों से बाहर निकलने में कामयाब हुए है। यही
नहीं इनमें से ज्यादातर नुस्खों का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।
कोरोना महामारी के बाद पूरे विश्व का ध्यान भारत की प्राचीनतम चिकित्सा प्रणाली की ओर
आकर्षित हुआ है। आयुर्वेद भारत की प्राचीनतम चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। आयुर्वेदिक
औषधियां अनेक जटिल रोगों के निदान में कारगर पायी गयी हैं। करोड़ों भारतवासी अपने घरों
में रहकर कोरोना का मुकाबला कर रहे है। योग, व्यायाम और दादी नानी की देशी चिकित्सा
जिसे हम आयुर्वेदिक प्रणाली भी कह सकते है से लोगों को बहुत लाभ मिला है इसमें शंका की
कोई बात नहीं है।
असल में हमारी बीमारी का इलाज हमारे पास ही होता है। कई बार उसके बारे में जानकारी नहीं
होती और कई बार जानकारी होती है तो हम उस दिशा में प्रयास नहीं करते। कोरोना में पीड़ित
मानवता को फिर से खुशहाल और समृद्ध करने की महत्ती आवश्यकता है। हम बीमार हैं क्योंकि
हमारी प्रकृति बीमार है। हमारा स्वास्थ्य प्रकृति के साथ हमारे व्यवहार का परिणाम है। कोरोना
वायरस हमारे रास्ते को सही करने का संकेत दे रहा है। वह हमें बता रहा है कि हमें प्रकृति का
सम्मान करना होगा। प्रकृति के बिना हमारा जीवन संभव नहीं है।
-बाल मुकुन्द ओझा