राज्यपाल की विश्वविद्यालयों को सलाह, उद्योगों से जुड़कर बनें उत्कृष्टता के केंद्र
जयपुर। विश्वविद्यालयों में पढ़ाई का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना भी होना चाहिए। इसके लिए उच्च शिक्षण संस्थानों को उद्योगों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर काम करना होगा। राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने शुक्रवार को लोकभवन में आयोजित प्रदेश के वित्तपोषित विश्वविद्यालयों की विशेष समीक्षा बैठक में यह बात कही।
उन्होंने कुलगुरुओं से कहा कि विश्वविद्यालयों में शोध और नवाचार की गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए। बदलती औद्योगिक जरूरतों को समझते हुए नए पाठ्यक्रम विकसित किए जाएं और विद्यार्थियों को व्यावहारिक कौशल से जोड़ा जाए। इससे युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलने के साथ उद्योगों को भी प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा।
ऑनलाइन व्याख्यान से विद्यार्थियों को मिलेगी विशेषज्ञों की जानकारी
राज्यपाल ने कहा कि सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के दौर में विश्वविद्यालयों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करना जरूरी है। इसके लिए केवल पाठ्यपुस्तकों पर निर्भर रहने के बजाय देश-विदेश के विषय विशेषज्ञों के ऑनलाइन व्याख्यान भी आयोजित किए जाने चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय अलग-अलग विषयों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की पहचान करें और उनकी ऑनलाइन सेवाएं लेकर विद्यार्थियों को पढ़ाई से जोड़ें। इससे छात्रों को अपने विषय की आधुनिक जानकारी और विशेषज्ञों के अनुभव का लाभ मिल सकेगा। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
उद्योगों की मांग के मुताबिक तैयार हों पाठ्यक्रम
बागडे ने विश्वविद्यालयों को उद्योग जगत के साथ नियमित संवाद बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि रोजगार बाजार में किस तरह के कौशल और विशेषज्ञता की जरूरत है, इसकी जानकारी लेकर उसी के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए।
उन्होंने नीमराना स्थित रैफल्स यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां उद्योगों की जरूरत के अनुसार विद्यार्थियों को शिक्षा और प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालय भी इस मॉडल से सीख लेकर अपने यहां शिक्षा और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सकते हैं।
भवन निर्माण और मरम्मत कार्यों में गुणवत्ता पर जोर
बैठक में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत विश्वविद्यालयों में चल रहे भवन निर्माण और मरम्मत कार्यों की भी समीक्षा की गई। राज्यपाल ने निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरे हों और निर्माण की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाए।
उन्होंने निर्माण एजेंसियों के कामकाज की नियमित समीक्षा करने तथा संबंधित अधिकारियों को मौके पर जाकर भौतिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए। राज्य वित्तपोषित विश्वविद्यालयों को उपलब्ध कराई गई अनुदान राशि का उचित उपयोग सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि निर्माण एजेंसियों के कार्यों का प्रमाणन गुणवत्ता के आधार पर किया जाना चाहिए।
दो वर्षों में खुले 76 नए कॉलेज
उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के निर्धारित मानकों के अनुरूप काम किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालयों को निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने और उपलब्ध बजट का सही उपयोग करने की बात कही।
अतिरिक्त मुख्य सचिव कुलदीप रांका ने बताया कि देशभर में उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो) बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में राजस्थान में नामांकन में 25 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश में पिछले दो वर्षों के दौरान 76 नए कॉलेज खोले गए हैं। जयपुर, जोधपुर और अलवर को उच्च शिक्षा के ऐसे केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां विभिन्न शैक्षणिक विषयों और विश्वविद्यालयों के बीच समन्वय स्थापित हो सके।
रांका ने विश्वविद्यालयों में स्टार्टअप और इन्क्यूबेशन गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की नियुक्तियों जैसे सुझाव भी रखे। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक और औद्योगिक अनुभव मिल सकेगा।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर भी चर्चा
राज्यपाल के सचिव डॉ. पृथ्वी ने कहा कि विश्वविद्यालयों को समय की जरूरत के अनुसार विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के केंद्र के रूप में तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने इस दिशा में संचालित की जा सकने वाली विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी।
उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त नथमल डिडेल ने राज्य सरकार की उच्च शिक्षा से संबंधित योजनाओं और विभागीय कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया।
बैठक में प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, रोजगारपरक पाठ्यक्रम विकसित करने, उद्योगों के साथ समन्वय बढ़ाने और विश्वविद्यालयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।