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पायनियर के 100 साल पूरे, भारतीय किसानों को भी मिला कृषि नवाचार का लाभ

पायनियर के 100 साल पूरे, भारतीय किसानों को भी मिला कृषि नवाचार का लाभ

जयपुर। कृषि क्षेत्र में बीजों की गुणवत्ता, नई तकनीक और बेहतर पैदावार की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी दिशा में काम करने वाली वैश्विक कंपनी पायनियर ने कृषि नवाचार के 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं। कंपनी का कहना है कि वह उन्नत बीज विज्ञान और खेतों में व्यावहारिक कृषि विशेषज्ञता के माध्यम से किसानों की उत्पादकता बढ़ाने तथा उनकी आय को मजबूत करने में योगदान दे रही है।

पायनियर 70 से अधिक देशों में काम करता है और दुनिया भर में एक करोड़ से अधिक किसानों के साथ जुड़ा हुआ है। भारत में कंपनी की मौजूदगी 54 वर्षों से ज्यादा पुरानी है। यहां अलग-अलग जलवायु और मिट्टी की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हाइब्रिड बीज विकसित करने के साथ किसानों को खेती से जुड़ी तकनीकी सलाह भी दी जाती है। इसका उद्देश्य फसल की क्षमता का बेहतर उपयोग करना और मौसम की अनिश्चितताओं से होने वाले नुकसान के जोखिम को कम करने में मदद करना है।

देश के अलग-अलग कृषि क्षेत्रों में कंपनी की गतिविधियां स्थानीय जरूरतों के अनुसार दिखाई देती हैं। राजस्थान के शुष्क इलाकों में बाजरा उत्पादकों के लिए ऐसे हाइब्रिड पर जोर दिया गया है, जो कम बारिश और सूखे जैसी परिस्थितियों में भी फसल की पैदावार को सुरक्षित रखने में मदद कर सकें। तेलंगाना में मक्का किसान लंबे समय से पायनियर के जेनेटिक्स पर भरोसा करते आए हैं। कंपनी के अनुसार, करीब तीन दशकों से किसान मक्का उत्पादन बढ़ाने और परिवार की आजीविका सुधारने के लिए इन बीजों का उपयोग कर रहे हैं।

इसी तरह उत्तर प्रदेश में सरसों की खेती करने वाले किसानों को बुवाई की उपयुक्त पद्धतियों के जरिए पैदावार और बीज की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद मिल रही है। बिहार में धान उत्पादकों के लिए खेतों में फसल का आकलन और कृषि संबंधी आंकड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि मौसमी जोखिमों को समझने और उत्पादन में सुधार करने में सहायता मिल सके।

पायनियर, उन्नत बीज और जेनेटिक्स क्षेत्र की कंपनी वायलर का प्रमुख ब्रांड है। कंपनी के अनुसार, उसके वैश्विक अनुसंधान नेटवर्क में 130 से अधिक आधुनिक शोध सुविधाएं और 3,000 से ज्यादा वैज्ञानिक शामिल हैं। एग्री-टेक नवाचार पर रोजाना लगभग 30 लाख डॉलर का निवेश भी किया जाता है। इन संसाधनों के जरिए बीजों और फसल की विशेषताओं को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है।

वायलर के एपीएसी एवं रणनीतिक पहलों के प्रमुख रॉबर्ट कान ने कहा कि कंपनी की शुरुआत एक किसान, एक बीज और एक नए विचार से हुई थी। उनके मुताबिक, किसानों की बदलती जरूरतों के अनुरूप नवाचार करना आज भी कंपनी के काम का प्रमुख आधार है। जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों को देखते हुए ऐसे बीज विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है, जो बेहतर पैदावार देने के साथ बदलते मौसम के अनुकूल भी हों।

कंपनी की 100 वर्षों की यात्रा 1926 में हाइब्रिड मक्के के व्यावसायीकरण से शुरू हुई थी। अब पायनियर जीन-एडिटिंग टूल्स और फसल के गुणों को बेहतर बनाने वाली नई तकनीकों पर भी काम कर रहा है। कंपनी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में कृषि नवाचार को आगे बढ़ाना और बढ़ती वैश्विक आबादी की खाद्य जरूरतों को पूरा करने में किसानों की मदद करना है।

 

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