Dark Mode
आधी आबादी को मिला आरक्षण का हक़

आधी आबादी को मिला आरक्षण का हक़

मोदी केबिनेट ने अंततोगत्वा वर्षों से लंबित देश की आधी आबादी को आरक्षण पर अपनी मुहर
लगा दी है। लगभग 27 साल से महिला आरक्षण विधेयक संसद में अधरझूल में पड़ा था।
सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस इसके समर्थन में थे फिर भी विधेयक सियासत के चलते
लटका हुआ था। उम्मीद है मोदी सरकार नये संसद भवन में इसी पांच दिवसीय विशेष सत्र में
महिला आरक्षण पर बिल प्रस्तुत करेगी। इस बिल के आसानी से पारित होने की उम्मीद भी
नजर आ रही है क्योंकि बिल को लेकर विपक्षी नेताओं ने भी सहमति जताई है। पांच राज्यों में
विधान सभा चुनाव और अगले लोकसभा चुनावों में क्रेडिट लेने के लिए राजनीतिक पार्टियों में
होड़ मच गई है। कांग्रेस कह रही है हमारे दबाव के कारण ऐसा हुआ है जबकि भाजपा ने
इसका चुनावी लाभ उठाने की तैयारियां शुरू कर दी है।नई संसद में यह पहला बिल पेश होगा
और बिल पारित होने के बाद नई संसद का पहला कानून होगा।
सोमवार से शुरू हुए पांच दिवसीय संसद सत्र से पहले सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विभिन्न
राजनीतिक दलों ने सत्र के दौरान महिला आरक्षण विधेयक को पारित करने की जोरदार वकालत की।
महिला आरक्षण बिल का मुद्दा कोई नया नहीं बल्कि दशकों पुराना है। इसे कई बार संसद में पेश भी किया
जा चुका है लेकिन कुछ सदस्यों के भारी विरोध के कारण यह बिल पारित आज तक नहीं हो पाया है।
आरजेडी, समाजवादी पार्टी जैसी कुछ पार्टिया मौजूदा स्वरुप में इसका विरोध कर रही है। इन दलों ने
आरक्षण में पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जाति की महिलाओं का कोटा निर्धारित करने
का समर्थन किया है।
वर्ष 2010 में महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा से पास भी हो गया, लेकिन बात आगे बढ़ नहीं सकी।
उससे पहले विधेयक को 1998, 1999, 2002 और 2003 में बार-बार संसद से पारित कराने के प्रयास हुए थे।
इस बहुचर्चित विधेयक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें
आरक्षित करने का प्रावधान है। आंकड़ों से पता चलता है कि लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 15
फीसदी से कम है, जबकि कई राज्य विधानसभाओं में उनका प्रतिनिधित्व 10 फीसदी से कम है। आंकड़ों के
अनुसार, मौजूदा समय में लोकसभा में 78 महिला सांसद हैं, जोकि कुल सांसदों का मात्र 14 प्रतिशत है। वहीं
राज्यसभा में मात्र 32 महिला सांसद हैं, जोकि कुल राज्यसभा सांसदों का 11 प्रतिशत है। राज्यों की बात
करें तो आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश,

महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, ओडिशा, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना सहित कई राज्य विधानसभाओं में
महिलाओं का प्रतिनिधित्व 10 प्रतिशत से भी कम है। दिसंबर 2022 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार,
हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में 10-12 प्रतिशत महिला विधायक थीं।
दुनियाभर के देशों की राष्ट्रीय संसद से आंकड़े जुटाने वाली संस्था आईपीयू पार्लिने (IPU Parline) के
मुताबिक, महिला सांसदों के प्रतिशत के मामले में भारत विश्व में 141वें स्थान पर है। इस लिस्ट में 61.3
प्रतिशत महिला सांसदों के साथ रवांडा सबसे ऊपर है।
गौरतलब है एचडी देवगौड़ा की सरकार ने 81वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में संसद में महिला
आरक्षण विधेयक पेश किया। इसके तुरंत बाद गौड़ा की सरकार अल्पमत में आ गई और 11वीं लोकसभा
भंग हो गई। विधेयक को भाकपा सांसद गीता मुखर्जी की अध्यक्षता में एक संयुक्त संसदीय समिति के पास
भेजा गया, जिसने 9 दिसंबर, 1996 को लोकसभा में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। तत्पश्चात राष्ट्रीय
जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार ने 12वीं लोकसभा में 84वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में
विधेयक को फिर से पेश किया। इसके विरोध में एक राजद सांसद ने विधेयक को फाड़ दिया। विधेयक फिर
से लैप्स हो गया क्योंकि वाजपेयी सरकार के अल्पमत में आने के साथ 12वीं लोकसभा भंग हो गई थी।
एनडीए सरकार ने 13वीं लोकसभा में एक बार फिर विधेयक पेश किया। लेकिन सरकार फिर से इस मुद्दे
पर आम सहमति जुटाने में विफल रही। अनेक बार समर्थन और विरोध के बाद आखिर राज्यसभा से
महिला आरक्षण विधेयक को 1 के मुकाबले 186 मतों के भारी बहुमत से पारित कर दिया गया। हालांकि,
इसे लोकसभा में पेश नहीं किया जा सका। इसके बाद आजतक इसे कानून का रूप नहीं दिया जा सका है
जबकि संसद के अधिकंश सदस्य इसके प्रबल पक्षधर है।
बताया जाता है राजनीति में महिलाओं के लिये आरक्षण का मुद्दा भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के समय
सामने आया। वर्ष 1931 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में तीन महिला निकायों, नेताओं- बेगम शाह
नवाज़ और सरोजिनी नायडू द्वारा नए संविधान में महिलाओं की स्थिति पर संयुक्त रूप से जारी
आधिकारिक ज्ञापन प्रस्तुत किये गए थे।

Comment / Reply From

Newsletter

Subscribe to our mailing list to get the new updates!