हरिद्वार का रहस्यमयी काली मंदिर, जहां मां की कृपा पाने उमड़ते हैं श्रद्धालु
उत्तराखंड। हरिद्वार की पवित्र भूमि पर स्थित मां दक्षिण काली मंदिर आस्था और अध्यात्म का एक ऐसा केंद्र है, जहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। गंगा की नीलधारा के किनारे बसे इस प्राचीन मंदिर का धार्मिक महत्व न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि देशभर में माना जाता है।
हाल ही में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस मंदिर की महिमा का उल्लेख करते हुए श्रद्धालुओं से यहां दर्शन करने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया पर मंदिर का वीडियो साझा कर इसे श्रद्धा, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बताया।
नील पर्वत की तलहटी में स्थित यह सिद्धपीठ मां महाकाली को समर्पित है। मंदिर का वातावरण बेहद शांत और आध्यात्मिक अनुभूति से भरपूर माना जाता है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु खुद को गंगा की पावन धारा और मां काली की भक्ति में डूबा हुआ महसूस करते हैं।
मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान विषपान करने के बाद भगवान शिव ने इसी स्थान पर गंगा स्नान कर विष के प्रभाव को शांत किया था। कहा जाता है कि यहां गंगा की धारा दक्षिण दिशा की ओर मुड़ती है, जिसके कारण इस स्थान का नाम दक्षिण काली मंदिर पड़ा।
मंदिर की एक और विशेषता इसकी ऐतिहासिक और तांत्रिक परंपरा से जुड़ी मान्यताएं हैं। मान्यता है कि मंदिर की स्थापना 108 नरमुंडों पर की गई थी। गर्भगृह में मां काली के साथ शिवलिंग और भैरव बाबा की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं, जिनके दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है।
यहां स्थित अखंड धूना भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। कहा जाता है कि उत्तर भारत की सबसे बड़ी अखंड ज्वाला यहीं प्रज्वलित है, जो वर्षों से निरंतर जल रही है। भक्त इस धूने के दर्शन कर विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं, प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण का अनूठा संगम मां दक्षिण काली मंदिर को हरिद्वार के सबसे खास तीर्थ स्थलों में शामिल करता है। यही वजह है कि सालभर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती रहती है।