पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर देगा IMF
चंद महीने दिवालिया होने से बच जाएगा PAK, अक्टूबर में चुनाव से पहले क्या हैं इस डील के मायने
इस्लामाबाद/वॉशिंगटन . इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड यानी IMF ने पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर का लोन जारी करने का फैसला किया है। खास बात यह है कि पाकिस्तान सरकार और IMF के बीच यह डील 30 जून को हुई। ये इसलिए बेहद अहम है, क्योंकि 30 जून को ही पाकिस्तान को मिला IMF का पिछला पैकेज खत्म हो रहा था।
इसके मायने ये हैं कि अगर 30 जून तक यह डील नहीं हो पाती तो उसे नए सिरे से और नए पैकेज के लिए IMF से बातचीत करनी पड़ती और बहुत मुमकिन है कि तब तक तो पाकिस्तान दिवालिया हो जाता।
3 अरब डॉलर की जो डील अब हुई है, उसके लिए 8 महीने बातचीत चली। प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ खुद एक हफ्ते में चार बार IMF चीफ क्रिस्टलिना जिर्योजिवा से मिले।
पहले डील के बारे में जानिए
पाकिस्तान के अखबार ‘द डॉन’ ने डील पर एक रिपोर्ट पब्लिश की। इसमें कहा गया- शाहबाज शरीफ ने भले ही डील का ऐलान कर दिया हो, लेकिन इस पर आखिरी फैसला जुलाई में IMF बोर्ड मीटिंग में होगा। बहरहाल, इतना तो तय हो चुका है कि कुछ दिन देरी से ही सही पाकिस्तान के सरकारी खजाने में 3 अरब डॉलर पहुंच जाएंगे और हम डिफॉल्ट होने से बच जाएंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक- 2019 में कुल 6.5 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज पर IMF से डील हुई थी। यह 30 जून 2023 तक वैलिड थी। मायने ये कि पैकेज एक्सपायर होने के आखिरी दिन ही हम डिफॉल्ट होने से बचे। एक अच्छी खबर यह है कि 2019 के प्रोग्राम के 2.5 अरब डॉलर बकाया थे, लेकिन IMF 3 अरब डॉलर दे रहा है। अब सरकार इसका इस्तेमाल कैसे करती है, ये उस पर डिपेंड करता है।
लेकिन, ये चंद महीने की राहत क्यों
पाकिस्तान को इस साल नवंबर तक 17 अरब डॉलर बतौर कर्ज की किस्त चुकाना हैं। IMF से 3 अरब डॉलर मिलने का फायदा सिर्फ ये होगा कि सऊदी अरब, UAE और चीन जैसे देश उसे या तो नया कर्ज देंगे या फिर पुराने कर्ज की किस्तें चुकाने की मियाद बढ़ा देंगे। इन मुल्कों की शर्त ये थी कि पहले IMF पाकिस्तान को कर्ज दे, इसके बाद ये देश फंड देंगे। दूसरे शब्दों में इन्हें अपने पैसे की गारंटी चाहिए थी।
बहरहाल, ये देश जो नया कर्ज देंगे वो सिर्फ फॉरेक्स रिजर्व होगा। इसका मतलब ये हुआ कि ये देश जो पैसा देंगे उसे बतौर गारंटी डिपॉजिट सरकारी खजाने में रखा जा सकता है। इसमें से कोई पैसा बिना उस देश की मंजूरी के खर्च नहीं किया जा सकेगा।
इस डील के बाद पाकिस्तान ऑयल, गैस और फूड प्रोडक्ट्स इम्पोर्ट कर सकेगा और ये शाहबाज सरकार के लिए राहत की बात है, क्योंकि अक्टूबर में आम चुनाव होने वाले हैं और पाकिस्तान में महंगाई दर 40% से ज्यादा हो चुकी है। सरकार को इस डील से चंद महीने की राहत मिल गई है, क्योंकि वो घरेलू और विदेशी बैंकों से कुछ लाख डॉलर लेकर महंगाई काबू कर सकती है। इसका उसे सियासी फायदा होना तय है।
शाहबाज बोले- चीन के अहसानमंद
शुक्रवार को डील का ऐलान करते हुए शाहबाज शरीफ के साथ फाइनेंस मिनिस्टर इशाक डार भी मौजूद थे। शरीफ ने कहा- जब भी किसी इंटरनेशनल लीडर से मिलता हूं तो उसके चेहरे को देखकर लगता है, जैसे उसे इस बात का डर हो कि मैं उनसे कर्ज मांगने ही आया हूं।
पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम शाहबाज ने आगे कहा- चीन की कॉमर्शियल बैंक ने हमें मुश्किल वक्त में 5 अरब डॉलर का लोन दिया। सऊदी अरब जल्द ही 2 अरब डॉलर देगा। इसके अलावा UAE और इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक 1-1 अरब डॉलर देने का वादा किया है।