ब्रिटेन के प्रतिबंधों पर इजरायल की कड़ी प्रतिक्रिया
यरुशलम। इजरायल और ब्रिटेन के बीच कूटनीतिक तनाव अब और गहरा गया है। ब्रिटेन की ओर से इजरायली बस्तियों से आने वाली वस्तुओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद इजरायल ने जवाबी कार्रवाई का ऐलान किया है। इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने पूर्वी यरुशलम में स्थित ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद करने का आदेश देने की जानकारी दी।
इजरायल की कार्रवाई सिर्फ कांसुलेट तक सीमित नहीं है। सरकार ने कई ब्रिटिश सांसदों के देश में प्रवेश पर भी रोक लगाने का फैसला किया है। इसके अलावा वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण में ब्रिटेन की लंबे समय से चली आ रही भूमिका को खत्म करने और अमेरिका के नेतृत्व वाले गाजा समन्वय मिशन से ब्रिटेन को बाहर करने की घोषणा की गई है।
ब्रिटेन का पूर्वी यरुशलम के शेख जर्राह इलाके में स्थित कांसुलेट गाजा पट्टी, वेस्ट बैंक और यरुशलम से जुड़े फिलिस्तीनी मामलों पर मुख्य रूप से काम करता है। वहीं, इजरायल में ब्रिटेन के राजदूत का कार्यालय तेल अवीव स्थित ब्रिटिश दूतावास में अलग से संचालित होता है।
विदेश मंत्री गिदोन सार ने ब्रिटेन के हालिया कदमों को इजरायल के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया। उनका आरोप है कि लंदन की नीतियां इजरायल की संप्रभुता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं। सार ने कहा कि इजरायल को ब्रिटिश जनता से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन ब्रिटिश सरकार के लगातार उठाए जा रहे कदमों के कारण इजरायल को जवाब देना पड़ा।
विवाद की एक वजह वेस्ट बैंक में यहूदी बसने वालों की हिंसक गतिविधियों को लेकर ब्रिटेन की टिप्पणी भी बनी है। ब्रिटेन के ऊर्जा सुरक्षा और नेट जीरो सेक्रेटरी एड मिलिबैंड ने कुछ इजरायली बसने वालों की हिंसा को 'जातीय सफाया' बताया था। इसके बाद इजरायल की ओर से ब्रिटिश सांसदों के खिलाफ भी कार्रवाई की घोषणा की गई।
जिन ब्रिटिश सांसदों के प्रवेश पर रोक की घोषणा की गई है, उनमें पूर्व लेबर पार्टी नेता जेरेमी कॉर्बिन, योर पार्टी की सांसद जारा सुल्ताना, डायने एबॉट, नाज शाह, जॉन मैकडॉनेल और रिचर्ड बर्गोन के नाम शामिल हैं। ग्रीन पार्टी से जुड़ी हन्ना स्पेंसर, कार्ला डेनेयर, सियान बेरी और एली चोन्स पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
यरुशलम को लेकर इजरायल की स्थिति भी इस विवाद के केंद्र में है। इजरायल यरुशलम को अपनी 'अविभाजित राजधानी' मानता है और शहर पर अपने नियंत्रण को कब्जे के रूप में स्वीकार नहीं करता। सार ने कहा कि संयुक्त यरुशलम इजरायल की राजधानी है और उस पर देश की पूरी संप्रभुता है। उनके मुताबिक विदेशी गतिविधियां तय नियमों और सहमत प्रक्रियाओं के तहत ही संचालित होनी चाहिए।
सार ने यह भी कहा कि ब्रिटेन के खिलाफ घोषित कदम प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ चर्चा और समन्वय के बाद उठाए गए हैं। इस घटनाक्रम से साफ है कि बस्तियों, वेस्ट बैंक, गाजा और यरुशलम को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अब खुले कूटनीतिक टकराव का रूप ले रहे हैं।