जोधपुर – एमबीएम विश्वविद्यालय का द्वितीय दीक्षांत समारोह संपन्न
- राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने विद्यार्थियों को प्रदान की उपाधियाँ एवं स्वर्ण पदक
- 717 स्नातक, 117 स्नातकोत्तर, 07 पीएचडी उपाधियाँ, 16 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक
- "तकनीकी शिक्षा को राष्ट्र निर्माण से जोड़ें युवा" – राज्यपाल
- "नैतिक मूल्य, समावर्तन संस्कार और तकनीकी कौशल समय की आवश्यकता"
जोधपुर। राजस्थान के माननीय राज्यपाल एवं एमबीएम विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने बुधवार को विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को उपाधियाँ एवं स्वर्ण पदक प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण में तकनीकी शिक्षा की भूमिका का स्मरण कराते हुए कहा कि शिक्षा केवल औपचारिक डिग्री तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह समाज एवं देश के प्रति दायित्व बोध का माध्यम बने। राज्यपाल श्री बागडे ने कहा कि दीक्षांत केवल एक समारोह नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन का नया अध्याय है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे तकनीकी ज्ञान को ‘रोजगार’ तक सीमित न रखें, बल्कि ‘राष्ट्र पहले’ की भावना से नवाचार, उद्यम और जनकल्याण में इसका प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि नवगठित एमबीएम विश्वविद्यालय ने अल्प समय में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के तहत स्वीकृत 20 करोड़ की राशि, पेट्रोलियम इंजीनियरिंग विभाग की स्थापना, एआई एवं डेटा साइंस जैसे आधुनिक पाठ्यक्रम, 5जी स्पेक्ट्रम लैब तथा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इसके उदाहरण हैं। राज्यपाल ने छात्राओं की उल्लेखनीय भागीदारी को महिला सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक संकेत बताया। उन्होंने विश्वविद्यालय की ‘विद्यादान’ परंपरा को शिक्षा के सर्वसुलभिकरण की दिशा में अनुकरणीय पहल बताया। इस अवसर पर कुल 717 स्नातक (जिसमें 32 बी.आर्किटेक्चर एवं 30 एमसीए), 117 स्नातकोत्तर, 07 पीएचडी उपाधियाँ और 16 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।
"तकनीकी शिक्षा नवाचार और आत्मनिर्भर भारत का आधार" – उपमुख्यमंत्री डॉ. बैरवा
दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा न केवल व्यक्तिगत विकास बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय उन्नति का माध्यम है। डॉ. बैरवा ने कहा कि युवा शक्ति नवाचार की जननी है और उन्हें चाहिए कि वे केवल डिग्री तक सीमित न रहकर नवाचार करें, स्वरोजगार अपनाएं और अन्य युवाओं को भी प्रेरित करें। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस युग में अभूतपूर्व अवसरों के साथ चुनौतियाँ भी हैं, जिन्हें युवा वर्ग अपने आत्मविश्वास और ज्ञान से पार कर सकते हैं। दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कुलपति प्रो. डॉ. अजय कुमार शर्मा ने की। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि अर्जित ज्ञान को समाज, राष्ट्र एवं मानवता के हित में प्रयुक्त करें। इस अवसर पर शहर विधायक श्री देवेंद्र जोशी, विधायक जालोर श्री छगन सिंह राजपुरोहित, विधायक सिवाना श्री हमीर सिंह भायल, बोर्ड ऑफ मैनेजमंेंट, राज्यपाल मनोनीत सदस्य प्रो. संत कुमार चौधरी, शैक्षणिक परिषद, राज्यपाल मनोनित सदस्य प्रो. माला त्रिवेदी, बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. अखिल रजन गर्ग, महाराणा प्रताप कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय उदयपुर के कुलगुरू प्रो. अजित कुमार कर्नावट, कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलगुरू श्री प्रो. अरूण कुमार, गोविन्द गुरू जनजातीय विश्वविद्यालय बांसवाड़ा के कुलगुरू प्रो. केशव सिंह ठाकुर, एन.आई.एफ.टी जोधपुर के निदेशक प्रो. जी.एच.एस. प्रसाद, काजरी जोधपुर के निदेशक प्रो. विनोद व्यास, आफरी जोधपुर के निदेशक प्रो. तरूण कान्त सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, संकाय सदस्य, विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।