भतीजे ने चाणक्य चाचा के हाथ से छीनी पार्टी
महाराष्ट्र में भतीजे ने चाणक्य चाचा को सियासी पटकनी लगाकर उनके द्वारा स्थापित पार्टी
को छीन लिया है। चुनाव आयोग ने भतीजे अजित पवार को एनसीपी का असली हकदार घोषित
कर दिया है। राजनीति के चाणक्य और चाचा शरद पवार की यह सबसे बड़ी हार हुई है। अजित
पवार ने जुलाई 2023 में अपने चाचा शरद पवार से बगावत कर 40 विधायकों के साथ महाराष्ट्र
की शिंदे सरकार में शामिल हो गए थे। इसके बाद गठबंधन सरकार में उन्हें डिप्टी सीएम
बनाया था। चुनाव आयोग ने मंगलवार को एनसीपी के अजित पवार गुट के पक्ष में फैसला
सुनाकर पार्टी अध्यक्ष शरद पवार को बड़ा झटका दे दिया। चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद
एनसीपी और उसके घड़ी चुनाव चिन्ह पर अजित पवार गुट का हक होगा। शरद पवार गुट को
अपने लिए नई पार्टी और चुनाव चिन्ह इस्तेमाल करना होगा। चुनाव आयोग के फैसले में कहा
गया है कि अजित पवार गुट को संगठनात्मक बहुमत मिला है। वहीं शरद पवार गुट बहुमत
साबित करने में कामयाब नहीं हो सके। सियासत में चाचा भतीजे के जंग की यह नई घटना
नहीं है। इससे पूर्व भी चाचा भतीजे को सियासी वर्चस्व की लड़ाई लड़ते देखा गया है। मगर
राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले कद्दावर नेता शरद पवार के हाथ से उसकी बनाई पार्टी यूं
साथ छोड़ देगी ऐसा उदहारण मिलना मुश्किल है। आज हम देश के अनेक चाचा भतीजों के
सियासी जंग की चर्चा करना चाहते है।
देश के कई रसूखदार राजनीतिक परिवारों में सत्ता संग्राम होते हुए देखा गया है। मगर चाचा
भतीजों की लड़ाई बेहद दिलचस्प है। राजनीति के परिवार विशेष के नियंत्रण में चलने वाली
पार्टियों में इस तरह की टूट देखने को मिलती ही मिलती हैं। सियासत में चाचा भतीजे की
कहानियां भी अजब गजब के रूप में याद की जाती है। अजित पवार और शरद पवार की तरह
पार्टी पर कब्जे को लेकर देश में ऐसे कई चाचा-भतीजे के मतभेद सामने आए है। शरद पवार -
अजित पवार, चिराग पासवान - पशुपति पारस, राज ठाकरे - बाल ठाकरे, गोपीनाथ मुंडे -
धनंजय, प्रकाश सिंह बादल - मनप्रीत बादल, अभय चौटाला - दुष्यंत चौटाला, अखिलेश और
शिवपाल की कहानियां लोग चटकारे लेकर सुनते और सुनाते है। महाराष्ट्र में चाचा शरद पवार और
भतीजे अजित पवार के बीच वर्चस्व की लड़ाई लड़ी जा रही है। महाराष्ट्र में ही शिवसेना प्रमुख दिवंगत बाल
साहेब ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे ने उनकी पार्टी शिवसेना से बगावत कर दूसरी पार्टी मनसे बना ली। चचेरे
भाई उद्धव ठाकरे को ज्यादा तरजीह मिलने लगा तब नवंबर 2005 में राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़ने का
ऐलान कर दिया। मार्च 2006 में उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का गठन किया। बड़े ठाकरे ने अपने बेटे
उद्धव को सियासत की चाबी सौंप कर भतीजे की बलि ले ली। बिहार में लोकजनशक्ति पार्टी के प्रमुख
दिवंगत रामविलास पासवान के बाद चाचा और भतीजे में पार्टी पर कब्जा करने केलिए संघर्ष हुआ। जिसके
चलते पासवान की दो खेमों में बंट गई। उत्तरप्रदेश में चाचा शिवपाल और भतीजे की लड़ाई पिता मुलायम के
सामने ही शुरू हो गई थी। राजनीति में चाचा भतीजे की लड़ाई में कुछ दिनों पहले तक शिवपाल यादव और
अखिलेश यादव की चर्चा काफी थी। हालांकि अभी दोनों साथ हैं।
पंजाब में प्रकाश सिंह बादल और मनप्रीत बादल के रूप में चाचा-भतीजे की जोड़ी कभी बहुत हिट रही थी।
मनप्रीत सिंह बादल पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल के दिग्गज नेता प्रकाश सिंह बादल
के भाई गुरदास सिंह बादल के बेटे हैं। 1995 में मनप्रीत पहली बार विधायक बने। अकाली दल के टिकट पर
2007 तक लगातार 4 बार विधायक चुने गए। 2007 में पंजाब की प्रकाश सिंह बादल सरकार में वित्त मंत्री भी
बने लेकिन धीरे-धीरे बादल फैमिली में भी खींचतान शुरू हो गई। अक्टूबर 2010 में उन्हें पार्टी विरोधी
गतिविधियों के आरोप में अकाली दल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
हरियाणा में भतीजे दुष्यंत चौटाला ने चाचा अभय चौटाला को चित्त कर दिया। 2013 में ओमप्रकाश चौटाला
और उनके पुत्र अजय चौटाला 10 साल के लिए जेल चले गए. पार्टी की कमान अभय के हाथ में आ गई।
अभय खुद को सीएम पद का दावेदार मानने लगे। लेकिन दिसंबर 2018 में परिवार में कुनबा बिखर गया
और भतीजा दुष्यंत अलग जननायक पार्टी बनाकर अब बीजेपी की सरकार में उपमुख्यमंत्री है।
- बाल मुकुन्द ओझा