न्यू स्टार्ट खत्म, रूस ने बदले सुर
मॉस्को। रूस और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों को सीमित करने वाला न्यू स्टार्ट समझौता अब औपचारिक रूप से समाप्त हो चुका है। इसके साथ ही दोनों देशों पर इस समझौते से जुड़ी कोई कानूनी बाध्यता नहीं रह गई है। रूस के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अब वह अपने भविष्य के कदम स्वतंत्र रूप से तय करेगा।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, समझौते की अवधि पूरी होने के बाद इससे जुड़े सभी नियम और आपसी घोषणाएं प्रभावहीन हो चुकी हैं। मंत्रालय ने यह भी बताया कि रूस ने अमेरिका को परमाणु हथियारों की सीमा स्वेच्छा से बनाए रखने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन अब तक वॉशिंगटन की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला है।
रूस ने चेतावनी दी है कि यदि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा को किसी नए खतरे का सामना करना पड़ा, तो वह कड़े सैन्य और तकनीकी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। हालांकि, मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि अनुकूल परिस्थितियों में वह रणनीतिक स्थिरता के लिए बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के लिए तैयार है।
गौरतलब है कि न्यू स्टार्ट समझौता वर्ष 2010 में रूस और अमेरिका के बीच हुआ था और यह 2011 से लागू हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के परमाणु हथियारों और उन्हें ले जाने वाले साधनों की संख्या को सीमित करना था। बाद में इसकी अवधि बढ़ाकर फरवरी 2026 तक कर दी गई थी, जो अब पूरी हो चुकी है।
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सितंबर 2025 में संकेत दिया था कि अगर अमेरिका रणनीतिक संतुलन बिगाड़ने वाले कदम नहीं उठाता, तो रूस एक साल तक समझौते की सीमाओं का पालन जारी रख सकता है।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि उन्हें समझौते की समाप्ति को लेकर ज्यादा चिंता नहीं है और भविष्य में नए समझौते की संभावना बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि न्यू स्टार्ट के खत्म होने से वैश्विक हथियार नियंत्रण व्यवस्था कमजोर हो सकती है। यह समझौता दोनों देशों के बीच बचा हुआ आखिरी बड़ा परमाणु नियंत्रण समझौता था, जिसके समाप्त होने से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।