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‘दिमागी नक्सल’ पर सियासी घमासान, त्रिवेदी ने कांग्रेस को घेरा

‘दिमागी नक्सल’ पर सियासी घमासान, त्रिवेदी ने कांग्रेस को घेरा

नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने सोमवार को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम पर निशाना साधा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में उठाए गए ‘दिमागी नक्सल’ के मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि इस विषय पर प्रधानमंत्री की टिप्पणी के 24 घंटे के भीतर ही इसके विरोध में सामने आए लोगों ने यह स्पष्ट कर दिया कि ‘नक्सली दिमाग’ किसके भीतर है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने पत्रकारों से कहा कि देश स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है और ऐसे समय में प्रधानमंत्री द्वारा ‘दिमागी नक्सल’ का विषय उठाना बेहद महत्वपूर्ण और मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप है। उन्होंने दावा किया कि पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व जताया है। भाजपा सांसद ने कांग्रेस और चिदंबरम को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का 13 अप्रैल 2006 का बयान याद दिलाया। उन्होंने कहा कि उस समय मनमोहन सिंह ने नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था। त्रिवेदी ने सवाल उठाया कि कांग्रेस के लिए मनमोहन सिंह की बात सही है या आज चिदंबरम द्वारा कही गई बात। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान देश में नक्सलवाद का प्रभाव काफी व्यापक था। उस समय ‘पशुपति से तिरुपति’ तक रेड कॉरिडोर की चर्चा होती थी और 180 से अधिक जिले नक्सलवाद से प्रभावित बताए जाते थे। उन्होंने 2010 के दंतेवाड़ा हमले का भी उल्लेख किया, जिसमें सीआरपीएफ के 75 से अधिक जवानों की मौत हुई थी। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि जिन समस्याओं को कांग्रेस सरकारें खत्म करने में नाकाम रहीं, उन्हें प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने निर्णायक रूप से नियंत्रित किया। उन्होंने कहा कि इस समय उस क्षेत्र में 1800 से अधिक बैंक की ब्रांच खुल चुकी हैं, 1200 से अधिक एटीएम खुल चुके हैं और 6 हजार से अधिक मोबाइल टॉवर लग चुके हैं ताकि राष्ट्र की मुख्यधारा के साथ इन इलाकों का भी विकास हो सके। चिदंबरम के शासनकाल में 5 हजार से ज्यादा निर्दोष नागरिकों की मौत हुई। सुरक्षा बलों के 1913 जवान नक्सली अभियानों में शहीद हुए। 180 जिले नक्सल प्रभावित हुए। नक्सलियों के पास उपलब्ध 92 प्रतिशत से अधिक हथियार पुलिस से लूटे हुए थे। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 तक सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करने का दावा किया है और यह वही खतरा था, जिसे मनमोहन सिंह ने वर्ष 2006 में देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था। यूपीए के कार्यकाल के दौरान सीआरपीएफ के कई जवान शहीद हुए और वहां जश्न मनाया गया। इसे ही 'दिमागी नक्सल' कहते हैं। त्रिवेदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर पार्टी के पूर्व प्रधानमंत्री नक्सलवाद को गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती बताते थे, वहीं उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता इस मुद्दे पर अलग रुख अपना रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस से इस पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की। उन्होंने कहा कि 22 लाख लोगों को आयुष्मान भारत कार्ड उपलब्ध कराए जा चुके हैं। यह दृश्य जिसको खराब लगता है, वही दिमागी नक्सली है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई को केवल सुरक्षा बलों की कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि इसके वैचारिक प्रभाव से भी निपटना जरूरी है। इसी संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को महत्वपूर्ण बताया और कांग्रेस पर वैचारिक दोहरेपन का आरोप लगाया।

 

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