सावरकर को भारत रत्न पर सियासी घमासान, विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
नई दिल्ली। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए सवाल खड़े किए हैं और इसे राजनीतिक एजेंडा बताया है।
राजद सांसद मनोज झा ने इस बयान पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जब सरकार खुद सत्ता में है, तो फिर इस तरह की मांग करने का क्या मतलब है। उन्होंने कहा कि देश की असली समस्याओं पर बात करने के बजाय ऐसे मुद्दों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
वहीं, आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और निर्दलीय सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि हर किसी को अपनी राय रखने की आजादी है, लेकिन जब सत्ता से जुड़े लोग ऐसी मांग करते हैं, तो उसका मतलब अलग होता है। उन्होंने कांशीराम और 1857 की क्रांति के नायक धन सिंह गुर्जर को भारत रत्न देने की मांग भी दोहराई।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले को ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को बजट, किसानों और महंगाई जैसे मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए, न कि ऐसे विवाद खड़े करने चाहिए। उनका कहना था कि देश में अमीर और गरीब के बीच की खाई लगातार बढ़ रही है।
सपा सांसद डिंपल यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद में विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तापक्ष को बोलने की पूरी छूट मिलती है, जबकि विपक्ष के माइक बंद कर दिए जाते हैं।
कुल मिलाकर, सावरकर को भारत रत्न देने की मांग अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गई है। विपक्ष इसे सरकार की प्राथमिकताओं से ध्यान हटाने की कोशिश बता रहा है, जबकि आने वाले दिनों में इस पर सियासत और तेज होने के संकेत हैं।