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ब्रिटेन में सत्ता संकट, शबाना महमूद बन सकती हैं पहली मुस्लिम PM

ब्रिटेन में सत्ता संकट, शबाना महमूद बन सकती हैं पहली मुस्लिम PM

लंदन। अमेरिका के कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों को लेकर ब्रिटेन की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस विवाद के चलते प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर इस्तीफे का दबाव लगातार बढ़ रहा है। अब उनकी ही लेबर पार्टी के एक गुट ने खुलकर नेतृत्व परिवर्तन की मांग शुरू कर दी है।

हालांकि, स्टार्मर फिलहाल पद छोड़ने के मूड में नहीं हैं, लेकिन हालात उनके लिए लगातार मुश्किल होते जा रहे हैं। इसी बीच, नए प्रधानमंत्री पद की दौड़ में गृह मंत्री शबाना महमूद का नाम सबसे आगे माना जा रहा है।

एपस्टीन फाइल विवाद के चलते प्रधानमंत्री कार्यालय के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी को इस्तीफा देना पड़ा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने एपस्टीन समर्थक पीटर मंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटिश राजदूत नियुक्त करने में भूमिका निभाई थी। बाद में मैकस्वीनी ने इस फैसले को गलत माना।

पार्टी नियमों के चलते आसान नहीं चुनौती

लेबर पार्टी के नियमों के मुताबिक, किसी भी नेता को चुनौती देने के लिए पार्टी के कम से कम 20% सांसदों का समर्थन जरूरी है। यह नियम 2021 में लागू किया गया था। वर्तमान में पार्टी के करीब 404-405 सांसद हैं, ऐसे में लगभग 81 सांसदों का समर्थन जुटाना अनिवार्य होगा।

राजनीतिक अस्थिरता के इस दौर में शबाना महमूद को स्टार्मर का संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है। उनके अलावा स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग और पूर्व उपप्रधानमंत्री एंजेला रेनर भी दौड़ में शामिल हैं।

कश्मीरी मूल की हैं शबाना महमूद

45 वर्षीय शबाना महमूद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के मीरपुर क्षेत्र से ताल्लुक रखती हैं। उनका जन्म बर्मिंघम में पाकिस्तानी माता-पिता के घर हुआ था। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है और पेशे से बैरिस्टर हैं।

2010 में वह रुशानारा अली और यास्मिन कुरैशी के साथ ब्रिटेन की पहली महिला मुस्लिम सांसदों में शामिल हुई थीं। बाद में वह गृह मंत्री बनीं और पार्टी में मजबूत पहचान बनाई।

पार्टी में मजबूत पकड़

शबाना महमूद को कीर स्टार्मर की करीबी सहयोगी माना जाता है। वह लेबर पार्टी के दक्षिणपंथी गुट से जुड़ी रही हैं और प्रवासन नीतियों पर सख्त रुख के लिए जानी जाती हैं। उनका कहना है कि ब्रिटेन में रहना एक विशेषाधिकार है, अधिकार नहीं।

संसद में पहुंचने के कुछ ही महीनों बाद उन्हें पार्टी की अहम जिम्मेदारियां सौंप दी गई थीं। चुनावी रणनीति और प्रचार अभियानों में भी उनकी बड़ी भूमिका रही है।

अगर मौजूदा हालात में नेतृत्व परिवर्तन होता है, तो शबाना महमूद के पास इतिहास रचने का मौका होगा। वह न सिर्फ ब्रिटेन की पहली महिला मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं, बल्कि देश की राजनीति में एक नया अध्याय भी जोड़ सकती हैं।

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