आरबीआई ने जुटाए 3.53 लाख करोड़
मुंबई। बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी अतिरिक्त नकदी को संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को बड़ा कदम उठाया। केंद्रीय बैंक ने एक दिन की ओवरनाइट वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो यानी वीआरआरआर नीलामी के जरिए 3,53,390 करोड़ रुपये जुटाए।
आरबीआई ने इस नीलामी के लिए 5 लाख करोड़ रुपये की राशि अधिसूचित की थी। इसके जवाब में बैंकों और वित्तीय संस्थानों की ओर से 3,53,390 करोड़ रुपये की बोलियां आईं। केंद्रीय बैंक ने प्राप्त पूरी राशि को स्वीकार कर लिया। यह अधिसूचित राशि का 70 प्रतिशत से अधिक है।
नीलामी में राशि 5.24 प्रतिशत की कट-ऑफ दर और भारित औसत दर पर स्वीकार की गई। वीआरआरआर के जरिए बैंक अपनी अतिरिक्त नकदी आरबीआई के पास रखते हैं और इसके बदले ब्याज हासिल करते हैं। इससे बाजार में उपलब्ध अतिरिक्त पैसा कुछ समय के लिए सिस्टम से बाहर हो जाता है और बैंकिंग तरलता को संतुलित करने में मदद मिलती है।
दरअसल, जब बैंकिंग प्रणाली में जरूरत से ज्यादा नकदी आ जाती है, तब आरबीआई इस तरह के उपायों का इस्तेमाल करता है। इसका उद्देश्य बाजार में तरलता को नियंत्रित रखने के साथ-साथ मौद्रिक नीति के प्रभावी संचालन और महंगाई से जुड़े जोखिमों को सीमित करना भी होता है।
बैंकिंग सिस्टम में हाल के महीनों में तरलता बढ़ने के पीछे आरबीआई की कुछ विशेष पहलों की भी भूमिका रही है। इनमें इस साल 8 जून से शुरू की गई विशेष एफसीएनआर (बी) जमा योजना और विदेशी मुद्रा उधारी तथा बाह्य वाणिज्यिक ऋण के लिए उपलब्ध कराई गई डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा शामिल है।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, इन पहलों के बाद 11 सप्ताह से भी कम समय में करीब 73 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा देश में आई। इसमें सबसे बड़ा योगदान एफसीएनआर (बी) जमा से मिला, जिसके जरिए 65.40 अरब डॉलर जुटाए गए।
इतने बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा का प्रवाह इस बात का संकेत भी माना गया कि प्रवासी भारतीयों ने भारतीय बैंकिंग सिस्टम में अपना भरोसा बनाए रखा। 11 सप्ताह से कम समय में करीब 73 अरब डॉलर जुटाने का यह अभियान 2013 की एफसीएनआर (बी) स्वैप योजना से भी काफी बड़ा रहा। उस समय लगभग तीन महीने में करीब 26 अरब डॉलर की राशि जुटाई गई थी।
योजना को मिली जोरदार प्रतिक्रिया के बाद आरबीआई ने एफसीएनआर (बी) विंडो को तय समय से पहले बंद करने का फैसला किया। इसे पहले 30 सितंबर 2026 तक खुला रखने की योजना थी, लेकिन लक्ष्य समय से पहले पूरा होने के कारण इसे 31 अगस्त 2026 को ही बंद कर दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि बैंकिंग सिस्टम में आई अतिरिक्त विदेशी मुद्रा और नकदी को संतुलित रखना आरबीआई की प्राथमिकताओं में बना हुआ है। वीआरआरआर नीलामी इसी दिशा में उठाया गया एक अहम कदम है, जिससे बाजार की तरलता पर केंद्रीय बैंक की पकड़ मजबूत रहती है।