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रूस ने ईरान से किए संघर्ष समाधान पर विचार, फारस की खाड़ी में सुरक्षा पर जोर

रूस ने ईरान से किए संघर्ष समाधान पर विचार, फारस की खाड़ी में सुरक्षा पर जोर

मॉस्को/तेहरान। रूस के विदेश मंत्री सर्जेई लावरोव ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अरागची के साथ बातचीत के दौरान नए सिरे से संघर्ष बढ़ने से बचने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही चल रहे संकट के समाधान के प्रयासों में मॉस्को की मदद करने की इच्छा दोहराई। रूस के विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, सर्जेई लावरोव ने दोबारा संघर्ष शुरू होने से रोकने की तात्कालिक जरूरत पर जोर दिया और कहा कि इस स्थिति का समाधान सैन्य तरीकों से संभव नहीं है। मंत्रालय ने टेलीफोन वार्ता के अपने विवरण में कहा, “लावरोव ने सशस्त्र टकराव की पुनरावृत्ति को रोकने के महत्व पर जोर दिया, संकट के समाधान में रूस की निरंतर मदद की तत्परता दोहराई, जिसका कोई सैन्य समाधान नहीं है और फारस की खाड़ी में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक अवधारणा विकसित करने की रूस की पहल को याद किया, जिसमें सभी तटीय देशों की भागीदारी और बाहरी देशों का समर्थन शामिल हो।”
बातचीत के दौरान, अब्बास अरागची ने 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई हालिया ईरान-अमेरिका वार्ता की जानकारी दी। उन्होंने संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में अमेरिका की गतिविधियों पर चिंता भी जताई व इसके व्यापक प्रभावों को लेकर चेतावनी दी।
ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, अराघची ने कहा कि फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी गतिविधियों के क्षेत्रीय व वैश्विक शांति और स्थिरता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।
रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि मॉस्को ने कूटनीतिक प्रयास जारी रखने और ऐसे समाधान खोजने की प्रतिबद्धता का स्वागत किया, जो संघर्ष के मूल कारणों को संबोधित करें और क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करें। साथ ही, ईरान और उसके पड़ोसियों के वैध हितों को ध्यान में रखें।
लावरोव ने अपने ईरानी समकक्ष के प्रति संवेदना भी व्यक्त की। उन्होंने ईरान के पूर्व विदेश मंत्रालय प्रमुख और विदेश नीति की रणनीतिक परिषद के प्रमुख के. खर्राज़ी की हवाई हमले में हुई हत्या पर “गहरी संवेदना” व्यक्त कीं।
इस बीच, लावरोव द्विपक्षीय सहयोग और यूक्रेन तथा पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्षों पर चर्चा के लिए दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर चीन पहुंच गए हैं। इससे पहले, रूसी विदेश मंत्रालय ने घोषणा की थी कि 14-15 अप्रैल के दौरान वे अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ वार्ता करेंगे।
दोनों देशों के विदेश मंत्री संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन, जी-20, एपीईसी सहित विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग, उच्च-स्तरीय संपर्कों और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। साथ ही यूक्रेन संकट और मध्य पूर्व की स्थिति जैसे प्रमुख मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।
इसी बीच, क्रेमलिन के प्रवक्ता ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होरमुज़ जलडमरूमध्य पर की गई अमेरिकी नाकाबंदी से अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
उन्होंने कहा, “संभवतः ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय बाजारों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते रहेंगे; इसे काफी हद तक निश्चित माना जा सकता है।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस नाकाबंदी से जुड़े कई विवरण अभी स्पष्ट नहीं हैं, इसलिए इस पर विस्तृत टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी।
अमेरिका ने रविवार को स्पष्ट किया था कि वह 13 अप्रैल से ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश करने या वहां से निकलने वाले जहाजों पर व्यापक समुद्री नाकाबंदी लागू करेगा। यह कदम उस समय उठाया गया जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच उच्च स्तरीय वार्ता ईरान के परमाणु कार्यक्रम सहित प्रमुख मुद्दों पर किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी।

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