अपनी ही सरकार के खिलाफ अनशन पर पार्टी में चुप्पी।
कांग्रेस आलाकमान पायलट के पार्टी छोड़ने के इंतजार में।
जयपुर। राजस्थान में कांग्रेस में पिछले 4 साल से अपनी गतिविधियों के कारण सरकार और संगठन के लिए सरदर्द बने पूर्व डिप्टी सीएम और पीसीसी के पूर्व अध्यक्ष सचिन पायलट के बारे में आलाकमान ने अब अपना मन बना लिया है कि उन्हें पार्टी छोड़नी है तो छोड़े, पार्टी उन्हें रोकने और म नाने की कोई कोशिश नहीं करेगी। पार्टी के एक धड़े का मानना है कि सचिन पायलट का कांग्रेस छोड़ना कांग्रेस के लिए हितकर है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कांग्रेस आलाकमान पिछले डेढ़ माह से पायलट की विदाई की प्रतीक्षा कर रहा है क्योंकि उसके पास लगातार जानकारी आ रही है कि पायलट कभी भाजपा में अमित शाह से जाकर बातचीत कर रहे हैं कभी आप में अरविंद केजरीवाल से चौच लड़ा रहे हैं कभी अपनी नई पार्टी बनाने के लिए कार्यवाही में जुटे हुए हैं इसलिए पार्टी मान चुकी है कि पायलट को कांग्रेस छोड़नी है और वह छोड़ेंगे और जब तक कांग्रेस में रहेंगे कांग्रेस को नुकसान करते रहेंगे।
इस बार सचिन पायलट ने सरकार के खिलाफ जब अनशन का ऐलान किया तो आलाकमान की ओर से ना तो कोई आश्चर्य जताया गया ना उन्हें मनाने समझाने की कोई कोशिश की गई पायलट के समर्थको को उम्मीद थी कि अनशन रोकने के लिए आलाकमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर दबाव डालेगा कि वह सचिन पायलट से बात करें पर इसका उल्टा हुआ आलाकमान ने अशोक गहलोत की पीठ पर हाथ रख दिया और उनसे कहा है कि उनकी इच्छा हो जैसे इस मामले से निपटें प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा ने भी अशोक गहलोत का साथ दे दिया।
सचिन पायलट की आलाकमान पर कमजोर होती पकड़ को देखते हुए उनके समर्थक भी अब उनका साथ छोड़ने लगे हैं जानकारों का कहना है कि मंगलवार के अनशन में आने के लिए एक लाख से ज्यादा कार्यकर्ताओं का पायलट का टारगेट था परंतु यह संख्या हवा हो जाएगी क्योंकि भीड़ में कांग्रेस के कार्यकर्ता कम और गुर्जर समाज के लोग ज्यादा दिखेंगे क्योंकि वह पायलट को ऐसा कमजोर ना तो देखना चाहते हैं ना ऐसी स्थिति में छोड़ना चाहते हैं।