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समुद्र तटों की सैर से मिलता है अलौकिक आनंद

समुद्र तटों की सैर से मिलता है अलौकिक आनंद

विश्व महासागर दिवस प्रतिवर्ष 8 जून को मनाया जाता है। इस दिवस को मानाने का उद्देश्य लोगों को
समुद्र की विशेषता और बहुमूल्य वस्तुओं की सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना है। इसके लिए हर वर्ष एक
थीम जारी की जाती है। थीम जारी करने का उद्देश्य लोगों तक समुद्र के बारे में जागरूक करना है। इस वर्ष
2023 की थीम- ग्रह महासागर: ज्वार बदल रहे हैं रखी गई है।
खूबसूरत समुद्री तटों को देखने और समुद्र की लहरों से अठखेलियां करने के लिए महासागर
पर्यटकों की सबसे पसंदीदा जगह है। यहां उठती समुद्री तरंगे और उफनता समुद्र मन को
तरोताजा कर देता है। इसका प्राकृतिक दृश्य मन मोह लेने वाला है। वास्तव में यहां का मनोरम
दृश्य तुलना से परे है। समुद्र के सुनहरे और लुभावने तटों पर मनोरंजन के लिये सैर-सपाटा
करना सैलानियों के लिये कोई नई बात नहीं है। सैलानी यहाँ स्वर्गिक आनंद का अनुभव करते
हैं। समुद्र के सौन्दर्य को देखकर पर्यटकों की हृदय गति तीव्र हो जाती है। मानव जीवन को
विभिन्न प्रकार से जीवन दान देने वाले महासागरों में बढ़ता प्रदूषण चिंता का विषय बनता जा
रहा है। अरबों टन प्लास्टिक का कचरा हर साल महासागर में समा जाता है। आसानी से
विघटित नहीं होने के कारण यह कचरा महासागर में जस का तस पड़ा रहता है। अकेले हिंद
महासागर में भारतीय उपमहाद्वीप से पहुंचने वाली भारी धातुओं और लवणीय प्रदूषण की मात्रा
प्रतिवर्ष करोड़ों टन है। विषैले रसायनों के रोजाना मिलने से समद्री जैव विविधता भी प्रभावित
होती है। इन विषैले रसायनों के कारण समुद्री वनस्पति की वृद्धि पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
इन पंक्तियों के लेखक ने ब्रिटेन के अनेक महासागरों का अवलोकन करते हुए समुद्र तटों की
सैर का आनंद लिया है। ब्रिटेन के लोग आज भी समुद्रों की सुरक्षा के प्रति जागरूक है। यहाँ के
लोग इस बात का ध्यान रखते है की समुद्र प्रदूषण का शिकार नहीं हो। फिर भी समुद्र में
कचरा आदि बहाने की अनेक घटनाएं देखने और सुनने को मिलती है। हर साल महासागर
दिवस इसीलिए मनाया जाता है की हम महासागरों को स्वच्छ रखे और मानव मित्र के रूप में
इनकी रक्षा करें।
सागर दुनिया भर के लोगों के लिए भोजन, मुख्य रूप से मछली उपलब्ध कराता है किंतु इसके साथ ही यह
कस्तूरों, सागरीय स्तनधारी जीवों और सागरीय शैवाल की भी पर्याप्त आपूर्ति करता है। सागर के अन्य
मानव उपयोगों में व्यापार, यात्रा, खनिज दोहन, बिजली उत्पादन और नौसैनिक युद्ध शामिल हैं, वहीं

आनंद के लिए की गयी गतिविधियों जैसे कि तैराकी, नौकायन और स्कूबा डाइविंग के लिए भी सागर एक
आधार प्रदान करता है। समुद्र तटों की सैर मानव जीवन को अपार आनंद की अनुभूति कराते है। ये तट
प्रमुख पर्यटनीय स्थलों के रूप में विकसित हो रहे है जहाँ प्रति वर्ष लाखों लोग अठखेलियों के लिए आते है।
प्राकृतिक दृश्य मन मोह लेने वाला है। वास्तव में यहां का मनोरम दृश्य तुलना से परे है। समुद्र के सुनहरे
और लुभावने तटों पर मनोरंजन के लिये सैर-सपाटा करना सैलानियों के लिये कोई नई बात नहीं है। सैलानी
यहाँ स्वर्गिक आनंद का अनुभव करते हैं। समुद्र के सौन्दर्य को देखकर पर्यटकों की हृदय गति तीव्र हो जाती
है।
पृथ्वी पर जीवन का आरंभ महासागरों से माना जाता है। इसमे मनुष्य जीवन के साथ साथ समुद्री जीव जंतु
और पेड़ पौधों का जीवन निर्वाह होता है। महासागर असीम जैव विविधता का भंडार है। हमारी पृथ्वी का
लगभग 70 प्रतिशत भाग महासागरों से घिरा है। महासागरों में पृथ्वी पर उपलब्ध समस्त जल का लगभग
97 प्रतिशत जल समाया हुआ है। दुनियाभर के सागरों और महासागरों का क्षेत्रफल 367 मिलियन वर्ग
किलोमीटर है। महासागर रोजगार सृजन का बहुत बड़ा स्रोत है। यह करोड़ों लोगों के पेट भरने का उद्गम
स्थल है। मानव जीवन को ऑक्सीजन महासागरों से मिलती है। महासागर हमारे भोजन और दवाओं भंडार
है। यहाँ लाखों प्रजातियों के जीव जंतु मिल जाते है। देश और दुनिया के पर्यावरण को संतुलित करने का
काम भी महासागरों के माध्यम से होता है। महासागर के छोटे छोटे भागों को समुद्र तथा खाड़ी कहते हैं।
महासागरों की विशालता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यदि पृथ्वी के सभी महासागरों को
एक विशाल महासागर मान लिया जाए तो उसकी तुलना में पृथ्वी के सभी महाद्वीप एक छोटे द्वीप से
प्रतीत होंगे। पृथ्वी पर पाँच महासागर हैं इनमें प्रशांत महासागर 6,36,34,000 वर्ग मील, ऐटलैंटिक
महासागर 3,13,50,000 वर्ग मील, हिंद महासागर 2,83,56,000 वर्ग मील, आर्कटिक महासागर 40,00,000
वर्ग मील तथा ऐंटार्कटिक महासागर 57,31,000 वर्ग मील में फैला हुआ है।
विश्व में होने वाली वर्षा महासागरों पर ही निर्भर है। महासागर कभी सूखता नहीं, क्योंकि इसमें से जितना
पानी वाष्प बनकर उड़ता है। वह वर्षा द्वारा नदियों में बहकर पुनरू सागर में मिल जाता है। इस प्रकार से
पानी का एक चक्र बना रहता है। महासागर लहरों तथा ज्वार भाटा से कई प्रकार के कटाव एवं जमाव करता
है, जिनसे विशेष प्रकार की भू-आकृतियाँ बनती हैं। लहरों से विभिन्न प्रकार के द्वीप तथा खाड़ियों का
निर्माण होता है।

-बाल मुकुन्द ओझा

 

 

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