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सुरक्षित जीवन का आधार है जैव विविधता

सुरक्षित जीवन का आधार है जैव विविधता

बाल मुकुन्द ओझा
अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस 22 मई को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा हर साल जैव विविधता के मुद्दों के बारे में लोगों की समझ और जागरूकता विकसित करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम स्थानीय रूप से कार्रवाई, वैश्विक प्रभाव रखी गई है। हमारा जीवमंडल बहुत सारी विविधताओं से बना है। जैव विविधता दो शब्दों से मिलकर बनी है। जैव का अर्थ है जीवन और विविधता का अर्थ है अनेकता। जैव विविधता केवल पेड़-पौधों या जीव-जंतुओं तक सीमित नहीं है बल्कि पृथ्वी पर मौजूद सभी प्रकार के जीव जैव विविधता का हिस्सा हैं। इसे संरक्षित रखना मानव जीवन एवं आने वाली पीढि़यों के सुरक्षित भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। जैव विविधता को बनाये रखने के लिए यह महत्वपूर्ण है की हम अपनी धरती के पर्यावरण को बनाये रखे। जैव विविधता का संबंध मुख्य रूप से अलग अलग तरह के पेड़ पौधों और पशु पक्षियों का धरती पर एक साथ अपने अस्तित्व को बनाये रखने से है। लाखों विशिष्ट जैविक की कई प्रजातियों के रूप में पृथ्वी पर जीवन उपस्थित है और हमारा जीवन प्रकृति का अनुपम उपहार है। पेड़-पौधे, अनेक प्रकार के जीव-जंतु, मिट्टी, हवा, पानी, महासागर-पठार, समुद्र-नदियां इन सभी का संरक्षण जरुरी है क्योंकि ये सभी हमारे अस्तित्व एवं विकास के लिए महत्वपूर्ण है। भारत में संसार का 2.4 प्रतिशत भू-भाग है जिसके 7 से 8 प्रतिशत भू-भाग पर भिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं। प्रजातियों में भारत स्तनधारियों में 7वें, पक्षियों में 9वें और सरीसृप में 5वें स्थान पर है। विश्व के 11 प्रतिशत के मुकाबले भारत में 44 प्रतिशत भू-भाग पर फसलें बोई जाती हैं। भारत के 23.39 प्रतिशत भू-भाग पर पेड़ और जंगल फैले हुए हैं। हमारे ग्रह की जैविक संपदा तेज़ी से घट रही है और इसके लिए मानवीय गतिविधियों को ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है। पिछले बीस वर्षों में ही 27 प्रजातियाँ विलुप्त हो चुकी हैं। वर्तमान में, दुनिया की सभी पक्षी प्रजातियों में से 12 प्रतिशत, सभी स्तनपायी प्रजातियों में से 23 प्रतिशत, सभी उभयचर प्रजातियों में से 32 प्रतिशत और सभी जिम्नोस्पर्म प्रजातियों में से 31 प्रतिशत विलुप्त होने के खतरे में हैं।
दुनियाभर की 34 चिह्नित जगहों में से भारत में जैवविविधता के तीन हॉटस्पॉट हैं- जैसे हिमालय, भारत बर्मा, श्रीलंका और पश्चिमी घाट। यह वनस्पति और जीव जंतुओं के मामले में बहुत समृद्ध है और जैव विविधता के संरक्षण का कार्य करता है। पर्यावरण के अहम मुद्दों में से आज जैव विविधता का संरक्षण एक अहम मुद्दा है। जैविक विविधता के संवंर्धन और उसके संरक्षण की बड़ी चुनौती है साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों से लोगों की जरूरतों को भी पूरा करना होता है।
जैव विविधता के हृास से प्रायः परितंत्र की उत्पादकता कम हो जाती है, जिसके कारण विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं को प्रदान करने संबंधी उनकी क्षमता भी कम हो जाती है। जिनका हम लगातार उपभोग करते हैं। इससे परितंत्र में अस्थिरता आती है और प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, सूखा और तूफान एवं मानव जनित दबावों जैसे प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से लड़ने की क्षमता भी कम हो जाती है। वातावरण में तीव्र गति से होते नकारात्मक बदलाव के कारण बहुत से पेड़-पौधे और पशु-पक्षी विलुप्त हो चुके है जिससे जैव विविधता को बनाये रखने के स्तर में भी काफी गिरावट आई है। इसलिए यह जरुरी हो जाता है की मानव के अस्तित्व को बचाये रखने के लिए और अपने वातावरण की शुद्धता के लिए इन नकारात्मक बदलावों को काबू किया जाये ।
जैव-विविधता से हमारे रोजमर्रा की जरूरतों यथा रोटी ,कपड़ा, मकान, ईधन, औषधियों आदि आवश्यकताओं की पूर्ति होती है। यह पारिस्थितिक संतुलन को बनाये रखने तथा खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने में भी सहायक होती है। पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिक स्थिरता, फसल उत्पादन में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ तपन, बाढ़, सूखा, भूमि क्षरण आदि से बचाव के लिए जैव-विविधता संरक्षण समय की सबसे बड़ी जरूरत है। वर्तमान में मनुष्य का तकनीक की तरफ इतना ज्यादा झुकाव हो गया है वह इसके दुष्परिणाम को भी नहीं समझना चाहता । मानव के लिए यह सही समय है कि वह इस संकट को गंभीरता से ले और वातावरण को शुद्ध बनाने का संकल्प ले। साफ सुथरा वातावरण ही समृद्ध जैव विविधता को बढ़ावा दे सकता है। हर एक वनस्पति तथा जीव को रहने योग्य बनाने में अलग-अलग उद्देश्य है। इसलिए हमें अपने वातावरण की शुद्धता को उच्च स्तर तक पहुँचाना है तो जैव विविधता के संतुलन को बनाये रखने पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा। जिससे मानव जाति को जीवनयापन में किसी तरह की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

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