क्रूड ऑयल में उछाल, 110 डॉलर के करीब पहुंचा ब्रेंट
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल की सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 105 डॉलर के स्तर की ओर बढ़ता नजर आया।
ब्रेंट क्रूड ने कारोबार की शुरुआत 107.63 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से की। शुरुआती कारोबार में कीमत थोड़ी फिसलकर 107.16 डॉलर तक आई, लेकिन इसके बाद इसमें तेजी देखी गई। ब्रेंट 108 डॉलर के स्तर को पार करते हुए 108.77 डॉलर प्रति बैरल के ऊपरी स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में मुनाफावसूली के कारण कीमत में गिरावट आई।
भारतीय समयानुसार दोपहर 11:30 बजे ब्रेंट क्रूड 0.97 डॉलर यानी 0.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ 106.66 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसके बावजूद इसकी कीमत में हाल के दिनों में आई तेजी ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है।
डब्ल्यूटीआई क्रूड की चाल भी काफी तेज रही। इसने 1.43 डॉलर की बढ़त के साथ 103.91 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार शुरू किया। हालांकि शुरुआत में कीमत गिरकर 101.57 डॉलर तक पहुंची, लेकिन इसके बाद खरीदारी बढ़ी और डब्ल्यूटीआई 104.46 डॉलर प्रति बैरल के ऊपरी स्तर तक पहुंच गया। बाद में इसमें भी गिरावट आई और दोपहर 11:30 बजे यह 0.76 डॉलर यानी 0.75 प्रतिशत कमजोर होकर 101.72 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से जुड़ी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव तथा एक-दूसरे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनियों ने बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता पैदा कर दी है। फारस की खाड़ी और आसपास के समुद्री रास्तों में बढ़ते जोखिम ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।
इसके अलावा, ईरान की ओर से हॉर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाए जाने की चेतावनी ने भी वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ाई है। यह समुद्री मार्ग तेल की वैश्विक सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां आवाजाही में किसी भी बड़े व्यवधान का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
इधर, यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब के पश्चिमी बंदरगाहों पर हमलों और नाकाबंदी का दायरा बढ़ने से बाब-अल-मंदेब और लाल सागर के रास्ते होने वाले समुद्री व्यापार पर भी दबाव बढ़ा है। खाड़ी क्षेत्र और लाल सागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे से तेल की आपूर्ति को लेकर आशंकाएं गहरी हुई हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन, 5 सितंबर को ब्रेंट क्रूड 96.10 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर था। इसके बाद 7 सितंबर से आज तक इसकी कीमत में 12.67 डॉलर यानी करीब 13.18 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। इसी अवधि में डब्ल्यूटीआई क्रूड 92.09 डॉलर से बढ़कर करीब 12.37 डॉलर यानी 13.43 प्रतिशत महंगा हो चुका है।
कच्चे तेल की इस तेजी का असर भारत जैसी बड़ी तेल आयातक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। लंबे समय तक कीमतें ऊंची रहने पर आयात बिल बढ़ सकता है और इससे महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा रुपये की कीमत पर भी असर पड़ सकता है, जबकि कंपनियों की लागत बढ़ने से शेयर बाजार के प्रदर्शन पर दबाव बनने की संभावना रहेगी।
अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि पश्चिम एशिया का तनाव कितने समय तक बना रहता है। यदि तेल की सप्लाई प्रभावित होती है और अंतरराष्ट्रीय कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो भारत समेत कई तेल आयातक देशों को बढ़ी हुई लागत का सामना करना पड़ सकता है।