पोकरण में किसानों-पशुपालकों को सिखाई जल बचत की तकनीक
पोकरण। जल संरक्षण और कृषि में पानी के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केन्द्र, पोकरण में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत दो दिवसीय आवासीय कृषक एवं पशुपालक दक्षता संवर्धन प्रशिक्षण आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जल ग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग, भनियाणा की ओर से किया गया।
प्रशिक्षण में किसानों और पशुपालकों को क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी गई। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. दशरथ प्रसाद ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य जल संरक्षण, जल उपयोग दक्षता, मृदा एवं नमी संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई, जल-कुशल फसल उत्पादन और पशु पोषण जैसे विषयों पर व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना था।
तकनीकी सत्र में किसानों को खेत में बारिश के पानी को रोकने, मिट्टी के कटाव को कम करने और खेत में नमी बनाए रखने के उपाय बताए गए। साथ ही उपलब्ध सिंचाई जल का अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने की तकनीकों पर भी चर्चा हुई। डॉ. सुबोध बिश्नोई ने किसानों को जल उपलब्धता के अनुसार फसल और किस्म का चयन, समय पर बुवाई, फसल विविधीकरण, खरपतवार नियंत्रण तथा मृदा परीक्षण के आधार पर पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी दी।
शस्य वैज्ञानिक डॉ. कृष्ण गोपाल व्यास ने ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली के उपयोग से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं को समझाया। उन्होंने फिल्टर की सफाई, पाइप व लेटरल की देखभाल, लीकेज की पहचान तथा सिंचाई जल के उचित प्रबंधन का प्रदर्शन किया।
पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. राम निवास ने पशुपालकों को स्वच्छ पेयजल, संतुलित पशु आहार, चारा उत्पादन एवं भंडारण, खनिज पोषण और पशु आवास प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। पशुओं में स्वच्छता बनाए रखने, गर्मी के मौसम में उचित प्रबंधन और रोगों की रोकथाम के उपाय भी बताए गए।
प्रसार वैज्ञानिक डॉ. सुनील शर्मा ने शुष्क एवं मरुस्थलीय क्षेत्र में एकीकृत कृषि-पशुपालन प्रणाली को आय और आजीविका मजबूत करने का उपयोगी विकल्प बताया। प्रतिभागियों को फसल अवशेषों के पशु आहार में इस्तेमाल, पशु अपशिष्ट से जैविक खाद तैयार करने और कृषि व पशुपालन को आपस में जोड़कर संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने जलग्रहण विकास और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के महत्व पर भी चर्चा की। प्रायोजक संजीव कुमार, श्रीकांत और रतन सिंह सहित कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों एवं विषय विशेषज्ञों ने किसानों और पशुपालकों से स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने तथा जल की प्रत्येक बूंद का विवेकपूर्ण उपयोग करने का आह्वान किया।
प्रशिक्षण में मेकुबा, बान्धेबा और देबलपुरा गांवों से आए किसानों एवं पशुपालकों ने भाग लिया। आयोजकों ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी को जरूरी बताते हुए प्रतिभागियों का आभार जताया।