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भारत-न्यूजीलैंड समझौते से आर्थिक साझेदारी मजबूत, निवेश के अवसर बढ़ेंगे

भारत-न्यूजीलैंड समझौते से आर्थिक साझेदारी मजबूत, निवेश के अवसर बढ़ेंगे

नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह समझौता केवल वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कई नए क्षेत्रों में अपार संभावनाएं खुलेंगी। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले अधिकांश उत्पादों पर अब शून्य (जीरो) शुल्क लगेगा, जिससे भारतीय निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि इस समझौते के जरिए न्यूजीलैंड का बाजार भारत के लिए लगभग 140 सेवा क्षेत्रों में खुल गया है। इसके अलावा शिक्षा, खेल, संस्कृति, कृषि उत्पादकता और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि बौद्धिक संपदा और पारंपरिक चिकित्सा, विशेष रूप से आयुष से जुड़े क्षेत्रों में भी सहयोग को लेकर अहम करार किए गए हैं।
पीयूष गोयल ने कहा कि फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में हुआ समझौता विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसके तहत यदि भारत की कोई दवा अमेरिका या यूरोप जैसे विकसित देशों में स्वीकृत हो जाती है, तो न्यूजीलैंड में उसे तेज प्रक्रिया (फास्ट ट्रैक) के जरिए मंजूरी मिल सकेगी। इससे भारतीय दवा कंपनियों को बड़ा फायदा होगा और वैश्विक बाजार में उनकी पहुंच और मजबूत होगी।
उन्होंने आगे बताया कि इस व्यापक एफटीए का एक बड़ा लाभ निवेश के क्षेत्र में भी देखने को मिलेगा। पिछले 25 वर्षों में न्यूजीलैंड ने भारत में करीब 70 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, लेकिन अब अगले 15 वर्षों में लगभग 20 बिलियन डॉलर (करीब 2 लाख करोड़ रुपए) का निवेश करने की योजना है। इससे देश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और व्यापार-उद्योग को मजबूती मिलेगी।
मंत्री ने आगे कहा कि इस समझौते को न्यूजीलैंड की संसद में पेश किया जाएगा। वहां सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों दल इसका समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में वहां से जल्द ही मंजूरी मिलने के बाद इस साल के अंत तक यह समझौता लागू हो सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह समझौता भारत के 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और अमृत काल में देश की आर्थिक प्रगति को नई गति देगा।

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