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ईरान की भागीदारी जरूरी'... सऊदी और पाक रक्षा करार पर बोले खामनेई के सलाहकार

ईरान की भागीदारी जरूरी'... सऊदी और पाक रक्षा करार पर बोले खामनेई के सलाहकार

तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई के वरिष्ठ सलाहकार मेजर जनरल याह्या रहीम सफवी ने सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए रक्षा समझौते को सकारात्मक कदम बताते हुए तेहरान से इसमें शामिल होने का अनुराेध किया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मेजर जनरल सफवी ने शनिवार को एक साथ साक्षात्कार में कहा कि यह समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है और ईरान को इसमें भाग लेने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्हाेंने कहा, “हम इस संधि को सकारात्मक मानते हैं। पाकिस्तान ने घोषणा की है कि अन्य देश इसमें शामिल हो सकते हैं और मैं सिफारिश करता हूं कि ईरान भी इसमें भाग ले।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान, सऊदी अरब, पाकिस्तान और इराक एक सामूहिक रक्षा समझौते की ओर बढ़ सकते हैं। मेजर जनरल सफवी ने कहा, “हालांकि सऊदी अरब और पाकिस्तान अमेरिकी मंजूरी के बिना ऐसे किसी समझौते काे अंतिम रूप नहीं देंगे लेकिन हमें क्षेत्रीय शक्ति के रूप में अपना इरादा जाहिर करना चाहिए।”

उल्लेखनीय है कि यह बयान रियाद में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच हस्ताक्षरित ‘रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते’ के एक सप्ताह बाद आया है। इस समझौते के तहत दोनों देशों के खिलाफ किसी भी आक्रमण को दोनों देशाें पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने संकेत दिया कि समझौता सभी सैन्य साधनों को "कवर" करता है। हालांकि इसमें परमाणु हमले के बारे में काेई स्पष्टता नहीं है।

इस बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे पश्चिम एशिया के मुस्लिम देशों के बीच राजनीतिक, सुरक्षा और रक्षा सहयोग की व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा प्रणाली की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा, “ईरान इस रक्षात्मक समझौते का स्वागत करता है जो भाईचारे वाले मुस्लिम देशों सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच है।”

उधर सफवी ने देश के खिलाफ इजरायली खतरों के बढ़ने का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान अपनी रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताओं को मजबूत करने के साथ ही "सामूहिक सुरक्षा ढांचे" के विकल्पाें के लिए खुला रवैया रखता है। जून में ईरान-इजरायल संघर्ष के बाद ईरान ने अपनी वायु रक्षा और खुफिया क्षमताओं में कमजोरियों को स्वीकार किया लेकिन साथ ही यह दावा किया कि ईरान ने इजरायली ठिकानाें को नष्ट कर जीत हासिल की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता और जनता के सकारात्मक रूख ने ईरान की सफलता में योगदान दिया।

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