ईशा देओल ने पैपराजी को दी नसीहत, बोलीं- व्यूज के लिए बुजुर्ग कलाकारों का अपमान गलत
मुंबई। फिल्म इंडस्ट्री में वरिष्ठ कलाकारों के साथ पैपराजी के व्यवहार और सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग को लेकर अभिनेत्री ईशा देओल ने अपनी बात रखी है। उनका मानना है कि कैमरे के सामने कलाकारों को असहज करने वाली हरकतों के पीछे सिर्फ फोटोग्राफर्स ही नहीं, बल्कि ऐसे कंटेंट को बढ़ावा देने वाले सोशल मीडिया पेज भी जिम्मेदार हैं। ज्यादा लाइक्स और व्यूज हासिल करने के लिए इस तरह की सामग्री प्रकाशित की जाती है।
ईशा ने आईएएनएस के साथ बातचीत में कहा कि फिल्म इंडस्ट्री के वरिष्ठ कलाकारों का सम्मान किया जाना चाहिए, क्योंकि इन्हीं लोगों ने सिनेमा को अपनी पहचान और मजबूती दी है। उन्होंने कहा कि ये कलाकार इंडस्ट्री के स्तंभ हैं और उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अभिनेत्री ने अपने परिवार के अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भी इस तरह के व्यवहार का सामना किया है। उनके मुताबिक, दिग्गज कलाकारों के साथ इस तरह पेश आना बिल्कुल सम्मानजनक नहीं है। हर व्यक्ति के साथ बातचीत करने का एक तरीका होता है और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होने का मतलब यह नहीं कि किसी की व्यक्तिगत सीमाओं को नजरअंदाज किया जाए।
ईशा ने पैपराजी के व्यवहार की तुलना बच्चों की परवरिश से करते हुए कहा कि जब कोई बच्चा बड़ा होकर अपने बड़ों के साथ गलत व्यवहार करता है, तो इसके पीछे उसकी परवरिश की भूमिका भी देखी जाती है। इसी तरह, उन्हें लगता है कि फोटोग्राफर्स को भी एक खास तरह के कंटेंट के लिए निर्देशित या प्रोत्साहित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि समस्या की जड़ उन लोगों तक भी पहुंचनी चाहिए, जो सोशल मीडिया पेज चलाते हैं और अधिक व्यूज पाने के लिए इस तरह की तस्वीरें और वीडियो पोस्ट करना चाहते हैं। केवल कैमरा चलाने वाले व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराने के बजाय उस पूरे सिस्टम पर ध्यान देना जरूरी है, जो ऐसे व्यवहार को लोकप्रिय बनाता है।
ईशा ने यह भी स्पष्ट किया कि हर कलाकार का स्वभाव अलग होता है। कुछ सेलिब्रिटी पैपराजी के साथ हंसी-मजाक और हल्की-फुल्की बातचीत सहजता से कर लेते हैं, जबकि कुछ लोगों को इस तरह का व्यवहार पसंद नहीं होता। ऐसे में फोटोग्राफर्स को सामने वाले की सहजता को समझते हुए अपनी सीमाओं का ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जहां कलाकार बातचीत और मस्ती के लिए सहज हों, वहां ऐसा किया जा सकता है, लेकिन जहां कोई असहज महसूस करे, वहां उसकी सीमा का सम्मान होना चाहिए। ईशा की इस बात का सार यही है कि मनोरंजन और सोशल मीडिया की लोकप्रियता के बीच वरिष्ठ कलाकारों की गरिमा और सम्मान से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।