वंदे मातरम पर कर्नाटक सरकार का आदेश, सरकारी कार्यक्रमों में सिर्फ 2 पद
बेंगलुरु। राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को लेकर जारी सियासी बहस के बीच कर्नाटक सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों के लिए अलग निर्देश जारी किए हैं। राज्य के आधिकारिक आयोजनों में अब गीत के केवल शुरुआती दो पद गाए जाएंगे। वहीं, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सभी छह पदों का गायन किया जाएगा।
राज्य सरकार के निर्देशों में केंद्र सरकार के कार्यक्रमों को भी अलग श्रेणी में रखा गया है। ऐसे आयोजनों में राष्ट्रीय गीत के सभी छह पद गाए जाने की बात कही गई है। यह आदेश केंद्र की उन नई गाइडलाइंस के बीच आया है, जिनमें सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के पूरे छह पद गाने पर जोर दिया गया है।
वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी पहले से चल रही है। विवाद उस समय और बढ़ा, जब कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान गीत के शुरुआती दो पदों के बाद भी गायन जारी रहने पर आपत्ति जताई थी। बताया गया कि जब उन्हें पता चला कि गायन आगे बढ़ चुका है, तो उन्होंने इसे रोकने का इशारा किया।
इस मुद्दे पर कांग्रेस के INDIA गठबंधन के सहयोगियों की भूमिका भी चर्चा में रही। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला श्रीनगर में आयोजित पहले इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में वंदे मातरम के पूरे गायन के दौरान खड़े रहे। गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइंस के अनुसार, गीत के करीब तीन मिनट 10 सेकंड के पूरे संस्करण के दौरान वे अपनी जगह पर खड़े रहे।
वंदे मातरम के संक्षिप्त संस्करण को लेकर इतिहास में भी राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ जुड़ा रहा है। 1937 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी के एक प्रस्ताव के बाद गीत के छोटे संस्करण को अपनाया गया था। उस समय पार्टी की ओर से इसे सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की दिशा में उठाया गया कदम बताया गया था।
अब कर्नाटक सरकार के नए आदेश ने इस पुराने मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। राज्य के सामान्य सरकारी कार्यक्रमों में दो पदों तक सीमित गायन और विशिष्ट संवैधानिक पदों की मौजूदगी वाले आयोजनों में पूरे छह पदों के प्रावधान के चलते केंद्र और राज्य के निर्देशों में अंतर भी साफ दिखाई दे रहा है।
राष्ट्रीय गीत के गायन को लेकर केंद्र की गाइडलाइंस और कर्नाटक सरकार के इस आदेश के बाद आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। भाजपा जहां पूरे गीत के गायन को लेकर जोर दे रही है, वहीं कांग्रेस शासित कर्नाटक ने सामान्य सरकारी आयोजनों के लिए शुरुआती दो पदों का प्रावधान रखा है।