PM मोदी ने शेयर किया ऋग्वेद का स्वस्तिवाचन, सुख-समृद्धि की कामना
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर ऋग्वेद के प्रथम मंडल के 89वें सूक्त का छठा मंत्र साझा किया। यह मंत्र प्रसिद्ध स्वस्तिवाचन के रूप में जाना जाता है और इसमें जीवन में सुख, शांति, सुरक्षा, सद्बुद्धि और समृद्धि की कामना की गई है।
मंत्र में कहा गया है— “स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः। स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः। स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥” इसका भावार्थ है कि यशस्वी इंद्रदेव हमारा कल्याण करें, समस्त ज्ञान के ज्ञाता और पालन-पोषण करने वाले पूषा यानी सूर्यदेव हमारे लिए मंगल करें। भगवान गरुड़ हमारी रक्षा करें और देवगुरु बृहस्पति हमें शांति, सद्बुद्धि व समृद्धि प्रदान करें।
वैदिक परंपरा में इस मंत्र का विशेष महत्व माना जाता है। शुभ कार्य, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान शुरू करते समय मंगल और कल्याण की कामना के लिए इसका पाठ किया जाता है। मंत्र के जरिए वैदिक देवताओं से व्यक्ति और समाज के जीवन में सकारात्मकता और सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है।
स्वस्तिवाचन में सबसे पहले देवराज इंद्र का स्मरण किया गया है। इंद्र को शक्ति, ऊर्जा और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। उनसे प्रार्थना की जाती है कि जीवन में शक्ति मिले और कठिन परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करने का सामर्थ्य बना रहे।
मंत्र में पूषा का भी उल्लेख है, जिन्हें सूर्य का एक स्वरूप माना जाता है। पूषा को संसार के पालन-पोषण और पोषण से जोड़कर देखा गया है। इसलिए इस मंत्र में उनके माध्यम से अन्न, धन, स्वास्थ्य और जीवन में मंगल की कामना की जाती है।
इसके बाद तार्क्ष्य या अरिष्टनेमि का स्मरण आता है। अरिष्टनेमि का अर्थ ऐसे रक्षक से जुड़ा है, जिसकी नेमि यानी पहिए का घेरा सुरक्षित और अटूट हो। वैदिक भाव में उनसे सभी प्रकार के संकटों और विघ्नों से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
मंत्र के अंतिम चरण में देवगुरु बृहस्पति से मंगल और शुभता की कामना की गई है। बृहस्पति को ज्ञान, विवेक और सद्बुद्धि का प्रतीक माना जाता है। उनसे प्रार्थना की जाती है कि मनुष्य को सही निर्णय लेने की क्षमता मिले और वह जीवन में उचित मार्ग पर आगे बढ़ सके।
इस तरह ऋग्वेद का यह स्वस्तिवाचन केवल व्यक्तिगत कल्याण की प्रार्थना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शक्ति, आरोग्य, सुरक्षा, ज्ञान और समृद्धि जैसे जीवन के महत्वपूर्ण पक्षों के लिए मंगलकामना की गई है। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से मंत्र साझा किए जाने के बाद एक बार फिर इसकी वैदिक परंपरा और भावार्थ चर्चा में है।