जापान की पिच पर स्पिन का कमाल? वरुण ने दिया संकेत
नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय क्रिकेट टीम के अभियान को लेकर तैयारियां तेज हैं। टीम के अनुभवी स्पिनर वरुण चक्रवर्ती का मानना है कि जापान में होने वाले मुकाबलों में स्पिन गेंदबाज अहम भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि उन्होंने साफ किया कि वहां का मौसम पिच के व्यवहार को किस तरह प्रभावित करेगा, यह फिलहाल कहना मुश्किल है।
वरुण ने एएसआईसीएस इंडिया की ओर से आईएएनएस के साथ बातचीत में कहा कि हर टूर्नामेंट की तरह एशियन गेम्स के लिए भी अच्छी तैयारी जरूरी होगी। उनके मुताबिक गेंदबाजी यूनिट को जापान की परिस्थितियों को जल्दी समझना और उसी हिसाब से अपनी रणनीति बनानी होगी। उनका फोकस फिलहाल किसी खास स्थिति के बजाय हर चुनौती के लिए तैयार रहने पर है।
जापान की पिचों को लेकर वरुण ने एक दिलचस्प संभावना जताई। उन्होंने कहा कि वहां पिचें शायद उतनी ज्यादा तैयार न हों, जिससे स्पिन गेंदबाजों को फायदा मिल सकता है। हालांकि मौसम के कारण पिच किस तरह खेलेगी, इसे लेकर वह निश्चित नहीं हैं। ऐसे में भारतीय गेंदबाजों को परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना होगा।
टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे वरुण ने अपने हालिया सफर को भी याद किया। उन्होंने बताया कि चोट के कारण एक समय उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन अब वापसी के बाद वह खुद को पहले से ज्यादा फिट महसूस कर रहे हैं। फिटनेस सुधारने के लिए उन्होंने स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और रनिंग पर काफी मेहनत की है। इसके लिए उन्होंने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में हुई ट्रेनिंग को भी अहम बताया।
वरुण की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने क्रिकेट अपेक्षाकृत देर से शुरू किया था। उन्होंने बताया कि 28 साल की उम्र में भारत के लिए खेलने का मौका मिला। अब क्रिकेट में उन्हें सात से आठ साल हो चुके हैं, लेकिन वह अपने करियर को अभी शुरुआती दौर में ही देखते हैं। उनका मानना है कि आगे अभी लंबा सफर बाकी है।
अपनी गेंदबाजी में लगातार सुधार को लेकर वरुण ने बताया कि वह पर्दे के पीछे नए वेरिएशन पर काम करते रहते हैं। हालांकि उनका मुख्य लक्ष्य हर बार कोई नई गेंद जोड़ना नहीं, बल्कि जो स्किल उनके पास पहले से है, उसे और बेहतर बनाना है।
मिस्ट्री स्पिनर के तौर पर उनकी गेंदबाजी को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं कि हाई-टेक कैमरों और वीडियो एनालिसिस के दौर में उनके वेरिएशन कितने गुप्त रह सकते हैं। वरुण का मानना है कि आज क्रिकेट में किसी भी गेंद को लंबे समय तक छिपाकर रखना आसान नहीं है। हर मैच रिकॉर्ड होता है और टीमों के पास बड़ी संख्या में वीडियो एनालिस्ट मौजूद हैं।
इसके बावजूद वरुण के मुताबिक क्रिकेट में ह्यूमन टच की अहमियत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि असली चुनौती बल्लेबाज को यह पता नहीं चलने देना है कि अगली गेंद क्या होगी। उनके अनुसार यही वह हिस्सा है जिसे केवल वीडियो या एआई के जरिए पूरी तरह पढ़ पाना मुश्किल है। गेंदबाज को दबाव में सही गेंद और सही जगह चुननी होती है।
करियर के भविष्य को लेकर भी वरुण लंबी योजनाओं के बजाय छोटे लक्ष्य तय करना पसंद करते हैं। उनका कहना है कि पांच साल बाद क्या होगा, इसकी सटीक योजना बनाना मुश्किल है। इसलिए वह अगले छह महीनों में हासिल किए जाने वाले लक्ष्यों पर ज्यादा ध्यान देते हैं। फिलहाल उनकी नजर फिटनेस, प्रदर्शन और आने वाली चुनौतियों पर है।