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कमजोरों के हथियार हैं आतंकवाद और धोखा !

कमजोरों के हथियार हैं आतंकवाद और धोखा !

हाल ही में श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के राजौरी में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़(एनकाउंटर) के दौरान आतंकियों ने आइईडी से विस्फोट कर दिया। इसमें हमारे देश के पांच सैनिक शहीद हो गए, जबकि एक अधिकारी समेत चार जवान इसमें घायल हुए हैं। आतंकवाद की इस घटना में ब्लास्ट में दो जवान मौके पर ही शहीद हो गए, जबकि तीन ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हालांकि बताया जा रहा है कि इस मुठभेड़ में कुछ आतंकी भी मारे गए हैं, लेकिन इनकी संख्या नहीं बताई गई है। यह घटना उस समय हुई, जब सेना की टीम राजौरी के कंडी वन क्षेत्र में तलाशी अभियान चला रही थी। टीम को जम्मू क्षेत्र के तोता गली इलाके में सेना के ट्रक पर हमला करने वाले आतंकियों के बारे में जानकारी मिली थी और कंडी जंगल की गुफा में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना पर यह अभियान शुरू किया गया था। वास्तव में इसे आतंकियों की कायराना हरकत ही करार दिया जा सकता है। आतंकी रह-रहकर हमारे सुरक्षा बलों, सेना के जवानों को निशाना बनाते रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब आतंकियों ने हमारी सेना के जवानों, सुरक्षा बलों को निशाना बनाया हो, इससे पहले भी 20 अप्रैल 2023 की दोपहर राजौरी सेक्टर में भीमबेर गली और पुंछ के बीच हाइवे से गुजर रहे सेना के एक वाहन पर आतंकवादियों ने गोलीबारी की थी,जिससे वाहन में आग लग गई थी और हमारे देश के पांच जवान शहीद हो गए थे। हालांकि ऐसा नहीं है कि सरकार आतंकवाद को कम करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठा रही है।सरकार कश्मीर घाटी ही नहीं अपितु संपूर्ण भारत में कहीं भी आतंकी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त से सख्त कदम उठा रही है। पिछले काफी समय से हमारे यहाँ इंटेलीजेंस ग्रिड को बढ़ाया और मजबूत किया गया है। समय समय पर आतंकियों के खिलाफ विभिन्न ऑपरेशंस, सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा हैं। रात में पेट्रोलिंग व सुरक्षा को बढ़ाया गया है। पिछले साल यानी कि वर्ष 2022 जुलाई में मॉनसून सत्र के दौरान लोकसभा में एक सवाल के जवाब में गृह राज्यमंत्री ने जानकारी दी थी कि वर्ष 2019 के बाद आतंकी हमलों और गतिविधियों में काफी हद तक कमी आई है। जम्मू और कश्मीर में वर्ष 2018 में 417 आतंकी हमले हुए थे, जो वर्ष 2021 तक घटकर 229 हो गए थे। बहरहाल, पिछले कुछ ही दिनों में कभी नक्सलवादियों तो कभी आतंकवादियों ने हमला कर यह दर्शाने की कोशिश की है कि उनके इरादे खतरनाक हैं। हाल ही में हुए हमले दर्शाते हैं कि आतंकवादियों द्वारा कश्मीर के माहौल को रह-रहकर खराब करने की कोशिशें जारी हैं। पिछले महीने ही सेना के ट्रक पर हमले की जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई थी कि अफगानिस्तान के तालिबान से अमरीकी एम-16 राइफल और एम-4 कार्बाइन जैसे हथियार जम्मू-कश्मीर में सक्रिय पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए- मोहम्मद के पास पहुंच रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक अमरीका के वर्ष 2021 में अफगानिस्तान छोड़ने के बाद नाटो सेनाओं के कई हथियार और गोला- बारूद तालिबान के कब्जे में आ गए थे और वही अब पाकिस्तान के रास्ते जम्मू- कश्मीर पहुंच रहे हैं। यह बहुत ही संवेदनशील व गंभीर है। आशंका जताई गई है कि तालिबान से मिले हथियारों के जरिए ही सेना के ट्रक पर हमले को अंजाम दिया गया था। सच तो यह है कि आज पाकिस्तान भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व के लिए एक खतरा बनकर उभर रहा है और वह विश्व का एक खतरनाक देश बन चुका है जो लगातार आतंकवाद, आतंकियों को पनाह देकर उनके रहमोकरम पर ही पल रहा है। हाल ही में एस सी ओ यानी कि शंघाई सहयोग संगठन की पणजी, गोवा में बैठक के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने कश्मीर मुद्दे को अप्रत्यक्ष रूप से उठाया लेकिन भारत ने आतंकवाद के नाम पर पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाई। यह काबिलेतारीफ है कि गोवा के पणजी में विदेश मंत्रियों के औपचारिक स्वागत के बाद बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर आतंकवाद पर उसे जमकर लताड़ लगाई। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का पूरी तरह खात्मा नहीं हुआ है और इसके(आतंकवाद) के हर स्वरूप को आज रोकने की जरूरत है। उन्होंने कहा है कि आज आतंकवादियों की फंडिंग करने वालों पर भी रोक की जरूरत है। जानकारी देना चाहूंगा कि एससीओ(शंघाई सहयोग संगठन) की बैठक में आतंकवाद को रोकने पर सहमति है। इस बैठक में चीन, पाकिस्तान, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री शामिल हुए हैं। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यहाँ तक कहा है कि बिलावल आतंकवादी देश का प्रवक्ता बनकर इस बैठक में शामिल हुए थे। भारत के रूख से यह बिल्कुल साफ हो गया है कि भारत आतंकवादी, आतंकवाद के नाम पर आज पाकिस्तान को भाव देने के मूड में तो कम से कम नहीं है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह बात कही जा सकती है कि आतंक पर एक्शन के बिना अब भारत व पाकिस्तान के बीच बर्फ का पिघलना बहुत ही मुश्किल है। जानकारी देना चाहूंगा कि वर्ष 2019 से ही भारत व पाकिस्तान के आपसी रिश्ते बेहद खराब चल रहे हैं और भारत व पाक संबंधों पर अभी भी बर्फ जमी हुई है। पुलवामा हमले में भी पाकिस्तान का ही हाथ था। जानकारी देना चाहूंगा कि दिसंबर 2022 तक भारत-पाक में बातचीत का कोई माहौल नहीं था, क्यों कि 15 दिसंबर 2022 को यू.एन.एस.सी में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यह बात कही थी कि, 'जो देश अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन का मेजबान हो सकता है और अपने पड़ोसी देश की संसद पर हमला करवा सकता है, उसे यू.एन. में उपदेशक बनने की कोई जरूरत नहीं है।' और इसके ठीक एक दिन बाद ही यानी कि 16 दिसंबर 2022, पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने न्यूयॉर्क में यू.एन.एस.सी के इतर यह बात कही थी कि , 'ओसामा बिन लादेन मर चुका है, पर बुचर ऑफ गुजरात जिंदा है और वो भारत का प्रधानमंत्री है। जब तक वो प्रधानमंत्री नहीं बना था, तब तक उसके अमेरिका आने पर पाबंदी थी।' कुल मिलाकर दिसंबर 2022 के ये दोनों बयान साफ इशारा कर रहे हैं कि उस वक्त दोनों देशों के बीच कितनी तल्खी थी। दोनों देशों के बीच बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं थी। सच तो यह है कि संयुक्त राष्ट्र में पाक विदेश मंत्री बिलावल के पीएम नरेंद्र मोदी के लिए अपशब्द कहने के बाद से पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते और बिगड़े हुए हैं। वास्तव में भारत हमेशा पंचशील के सिद्धांतों में विश्वास करता आया है और वह हमेशा हमेशा से शांति, संयय, धैर्य, अमन-चैन का पक्षधर रहा है। भारत का हमेशा से दो टूक संदेश यह रहा है कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का खात्मा करे, उसके बाद ही वार्ता की बहाली संभव हो सकती है। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के मंच से भी पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो, चीन और रूस के विदेश मंत्रियों की मौजूदगी में भारत ने यही आहवान किया है कि आतंकवाद से कड़ाई के साथ निपटने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि 'सीमापार आतंकवाद समेत इसके सभी स्वरूपों का खात्मा किया जाना चाहिए।' पाकिस्तान बात बात पर कश्मीर का राग अलापता रहता है लेकिन कभी भी आतंकवाद के खात्मे या सफाये की सीधी बात नहीं करता। भारत का कहना है कि वार्ता और आतंकवाद दोनों एक साथ नहीं चल सकते हैं। वार्ता तभी संभव है जब पाकिस्तान आतंकवादियों व आतंकवाद के खात्मे के प्रति प्रतिबद्ध और कृतसंकल्पित हो। वास्तव में, भारत आतंकवादियों व आतंक पर एक्शन के साथ ही अपने अभिन्न अंग पीओके(पाक अधिकृत कश्मीर) पर वार्ता चाहता है। आज पाकिस्तान की आर्थिक हालत बहुत ही खराब है और विश्व के किसी भी देश से छिपी नहीं है लेकिन बावजूद इसके पाकिस्तान आतंकवादियों व आतंकवाद को शरण देता रहा है और अपना उल्लू सीधा करता रहा है। विडंबना की बात है कि आज भी अमेरिका और चीन जैसे देश कहीं न कहीं पाकिस्तान को चोरी छिपे हथियारों की सप्लाई करते हैं और पाकिस्तान भारत से संबंध सुधारने की कवायद करता नजर आता है। दरअसल, पाकिस्तान की नीयत में हमेशा चीन की नीयत की तरह खोट रहा है। पाकिस्तान आतंकवादियों व आतंक के नाम पर कुछ भी नहीं करना चाहता, लेकिन भारत से बातचीत चाहता है लेकिन यह तब तक संभव नहीं हो सकता है जब तक कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ सख्त एक्शन की बात न करे। हाल ही में गोवा के पणजी में एससीओ की बैठक में पाकिस्तान के रवैये में नरमी जरूर महसूस की गई है, लेकिन वह कभी भी भरोसे के लायक नहीं कहा जा सकता है। एक तरफ पाकिस्तान बातचीत करता है तो दूसरी तरफ आतंकवाद को बढ़ावा देता नजर आता है। आज पाकिस्तान पर आतंकवाद को खत्म करने के लिए विदेशी दबाव भी है और पाकिस्तान उसी दबाव के बीच भारत से वार्ता का दिखावा करता नजर आता है, उसकी मंशा कुछ और ही नजर आती है।पाक के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने इस वर्ष जनवरी में अपनी यूएई की यात्रा के दौरान एक इंटरव्यू में कहा कि 'मोदी जी आइए बैठते हैं, बात करते हैं।' जानकारी देना चाहूंगा कि इस साल जनवरी में ही भारत ने पाकिस्तान को एससीओ बैठक में आने का न्योता भेजा था और पाकिस्तान ने इसे स्वीकार कर लिया था। हालांकि भारत हमेशा बातचीत के लिए तैयार है लेकिन पाकिस्तान इसके लिए सकारात्मक पहल तो करे। हाल फिलहाल, एससीओ से भारत ने आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान को यह साफ संदेश दे दिया है कि वार्ता व आतंकवाद दोनों साथ-साथ नहीं चल सकते हैं। अंत में यही कहना चाहूंगा कि किसी भी तरह का आतंकवाद स्वतंत्रतावादी मूल्यों पर हमला है। महात्मा गांधी जी ने एक बार यह बात कही थी कि'आतंकवाद और धोखा शक्तिशालियों के नहीं बल्कि कमजोरों के हथियार हैं।' हाल फिलहाल पाकिस्तान को यह बात समझने की जरूरत है कि हिंसा एक बीमारी है और किसी रोग का इलाज उसे और लोगों तक फैलाकर कभी भी नहीं किया जा सकता है। वायरस की तरह आतंकवाद आज हर जगह, हर स्थान पर है।आतंकवाद के बारे में भयानक बात ये है कि अंततः ये उन्हें नष्ट कर देता है जो इसका अभ्यास करते हैं, पाकिस्तान को यह बात अवश्य ही समझ लेनी चाहिए।

-सुनील कुमार महला

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