अमेरिका-ईरान समझौते पर मुहर, तय समय से पहले हुआ बड़ा ऐलान
- अमेरिका-ईरान समझौता तय तारीख से पहले हस्ताक्षरित हुआ।
- होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और तनाव कम करने पर सहमति बनी।
- डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पजशकियान ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
Tehran/Washington : अमेरिका और ईरान के बीच कई महीनों से जारी तनाव और संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में अहम प्रगति हुई है। दोनों देशों ने एक अंतरिम समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसे क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने फ्रांस के निकट स्थित Palace of Versailles में आयोजित कार्यक्रम के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने भी डिजिटल माध्यम से अपनी मंजूरी दी। समझौते की घोषणा भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह की गई।
समझौते के प्रमुख बिंदुओं में सभी मोर्चों पर संघर्ष विराम, होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन गतिविधियों को बहाल करना और आगे की व्यापक वार्ताओं के लिए ढांचा तैयार करना शामिल है। दोनों पक्ष अब अगले 60 दिनों के भीतर स्थायी व्यवस्था पर बातचीत करेंगे।
इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित थे, लेकिन कूटनीतिक प्रयासों के चलते इसे निर्धारित कार्यक्रम से पहले ही अंतिम रूप दे दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान और कतर ने वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वर्साय पैलेस क्यों है खास?
फ्रांस के निकट स्थित Palace of Versailles दुनिया के सबसे ऐतिहासिक और भव्य महलों में गिना जाता है। 17वीं शताब्दी में विकसित यह महल लंबे समय तक फ्रांस की सत्ता का केंद्र रहा। प्रथम विश्व युद्ध के बाद 1919 में यहीं प्रसिद्ध Treaty of Versailles पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसने इसे विश्व इतिहास में विशेष स्थान दिलाया।
जर्मनी ने भी बढ़ाई तैयारी
समझौते के बाद समुद्री सुरक्षा को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। जर्मनी ने लाल सागर क्षेत्र की ओर दो जहाज रवाना किए हैं, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग हटाने जैसे अभियानों में लगाया जा सकता है। हालांकि किसी भी संभावित मिशन के लिए संबंधित देशों की मंजूरी और आगे की कूटनीतिक प्रक्रिया अहम रहेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता मध्य पूर्व में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत है, लेकिन इसकी दीर्घकालिक सफलता दोनों देशों द्वारा आगे होने वाली वार्ताओं और समझौते की शर्तों के पालन पर निर्भर करेगी।