यमन में लड़ाई से 1.25 लाख लोग हुए विस्थापित
यूनाइटेड नेशंस. यमन में एक बार फिर तेज हुई लड़ाई का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े मानवीय सहायता संगठनों ने बताया है कि सितंबर की शुरुआत से जारी हिंसा के कारण करीब 1.25 लाख लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश करनी पड़ी है। विस्थापन के साथ नागरिकों की जान पर खतरा भी बढ़ गया है।
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) के अनुसार, संघर्ष के बीच राहत अभियान पहले से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। सुरक्षा स्थिति खराब होने के कारण सहायता कर्मियों की आवाजाही प्रभावित हुई है। पश्चिमी तट के कई इलाकों में राहत पहुंचाने का काम फिलहाल बाधित है, जबकि कई प्रमुख सड़कें बंद हैं या वहां से गुजरना जोखिम भरा हो गया है।
दो हफ्तों में 40 नागरिक हताहत
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने सितंबर के पहले दो हफ्तों में 40 नागरिकों के हताहत होने की पुष्टि की है। इनमें आठ लोगों की मौत हुई, जबकि 32 लोग घायल बताए गए हैं। खास चिंता की बात यह है कि मृतकों में करीब आधी संख्या महिलाओं और बच्चों की है। घायलों में भी आधे से अधिक महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।
ओसीएचए ने कहा कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी संगठन प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। शनिवार तक हजारों परिवारों को जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी थी। हालांकि, राहत सामग्री की कमी और सीमित फंडिंग के कारण जरूरत के मुताबिक सहायता पहुंचाना मुश्किल बना हुआ है।
राहत एजेंसियों के सामने सुरक्षा बड़ी चुनौती
संयुक्त राष्ट्र की मानवीय एजेंसियों ने सभी संघर्षरत पक्षों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। एजेंसियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन किया जाना चाहिए और राहत सामग्री को बिना किसी रुकावट के जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने दिया जाना चाहिए।
पश्चिमी तट के कई हिस्सों में हालात इतने कठिन हैं कि राहत कर्मियों की आवाजाही तक प्रभावित हो गई है। ऐसे में विस्थापित परिवारों को भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन गया है।
पश्चिमी तट पर बढ़ा संघर्ष
यमन की सरकारी सेना ने इस महीने की शुरुआत में दावा किया था कि पश्चिमी तट पर हूती विद्रोहियों के साथ करीब एक महीने चली लड़ाई में 500 से अधिक सैनिक मारे गए और लगभग 1,500 घायल हुए। सरकारी समर्थक नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज के मुताबिक ये आंकड़े 9 अगस्त से 10 सितंबर के बीच के हैं।
सरकारी पक्ष ने यह भी दावा किया कि इसी अवधि में 1,000 से ज्यादा हूती लड़ाके मारे गए और हजारों घायल हुए। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। इसलिए इन्हें संबंधित पक्षों के दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है।
मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद फैली जंग
बताया गया है कि संघर्ष की शुरुआत हूती समूह की ओर से मिसाइल, ड्रोन और विस्फोटक नौकाओं के जरिए किए गए हमलों के बाद हुई। इसके बाद लड़ाई लाल सागर के किनारे स्थित होदेदाह प्रांत के दक्षिणी हिस्से में स्थित हैस क्षेत्र से आगे बढ़कर पड़ोसी ताइज़ प्रांत के कई मोर्चों तक फैल गई।
संघर्ष उस समय और गंभीर हो गया जब हूती समूह ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य की दिशा में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की। तीन सितंबर को शुरू किए गए एक बड़े सैन्य अभियान ने लाल सागर तट पर नियंत्रण की स्थिति को भी प्रभावित किया।
इस अभियान के दौरान हूती लड़ाकों ने होदेदाह और पड़ोसी ताइज़ प्रांत के कई इलाकों पर कब्जा करने का दावा किया, जो पहले सरकार के नियंत्रण में बताए जाते थे। लगातार बदलते सैन्य हालात के बीच नागरिकों का विस्थापन बढ़ रहा है और मानवीय संकट और गहराता जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र ने ऐसे समय में सभी पक्षों से संयम बरतने और नागरिक आबादी को संघर्ष से दूर रखने की अपील की है। एजेंसियों का कहना है कि राहत कार्यों को सुरक्षित तरीके से जारी रखने के लिए मानवीय सहायता के रास्ते खुले रखना बेहद जरूरी है।