ट्रंप के बयान पर ईरान का पलटवार
तेहरान. ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि जब तक तेहरान की शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक अमेरिका के साथ किसी बातचीत की संभावना नहीं है।
रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोमवार के बयान के बाद दी। ट्रंप ने दावा किया था कि कमजोर स्थिति में पहुंच चुका ईरान जल्द समझौता करना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा था कि अमेरिका बातचीत फिर शुरू करने के विचार के लिए तैयार है, लेकिन अंतिम फैसला वही करेंगे।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा था कि ईरान जल्दी समझौता करना चाहता है और अमेरिका इस मुद्दे पर बातचीत करने के विकल्प को खुला रखेगा।
रेजाई ने कहा- बयानों से भ्रमित न हों
ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रेजाई ने उनके रुख में कथित बदलाव को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के अलग-अलग बयानों से भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, कभी बातचीत से इनकार किया जाता है और फिर वार्ता के लिए तैयार होने की बात कही जाती है।
रेजाई ने तेल और समुद्री मार्गों से जुड़े घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने संकेत दिया कि परिस्थितियां पहले जैसी नहीं रह गई हैं और बाद में नुकसान की भरपाई करने की कोशिश से आने वाली परिस्थितियों को बदला नहीं जा सकेगा।
ईरानी अधिकारी ने अपने रुख को बेहद स्पष्ट शब्दों में दोहराते हुए कहा कि ईरान की शर्तें पूरी होने तक कोई बातचीत नहीं होगी। उनके बयान से संकेत मिलता है कि फिलहाल तेहरान अमेरिकी प्रस्ताव को लेकर नरम पड़ने के मूड में नहीं है।
जून में हुआ था समझौता ज्ञापन
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच पहले हुए समझौते का भविष्य भी सवालों में है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों ने 18 जून को क्षेत्र में जारी संघर्षों को कम करने और तनाव घटाने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन यानी एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे।
इस समझौते में लेबनान सहित विभिन्न मोर्चों पर तनाव कम करने की दिशा में काम करने की बात कही गई थी। दोनों पक्षों को 60 दिनों के भीतर बातचीत के जरिए अंतिम समझौते तक पहुंचना था। यह समयसीमा 17 अगस्त को समाप्त हो चुकी है।
इसके बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ने से बातचीत की आगे की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। ऐसे में रेजाई का ताजा बयान अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक दूरी के बने रहने का संकेत देता है।
दक्षिणी तट पर ड्रोन हमले से हड़कंप
अमेरिका-ईरान संबंधों में बयानबाजी के बीच ईरान के दक्षिणी तट के पास सोमवार रात एक अलग घटना ने भी चिंता बढ़ा दी। रिपोर्ट के अनुसार, ड्रोन हमले में दो मछली पकड़ने वाली नौकाओं को निशाना बनाया गया।
अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर के मुताबिक, यह घटना दक्षिणी बंदरगाह शहर कारगन के तट और लारक द्वीप के आसपास हुई। होर्मोजगान प्रांत के राजनीतिक और सुरक्षा मामलों के उप-गवर्नर अहमद नफीसी ने बताया कि घटना के बाद कई मछुआरों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
लापता मछुआरों की तलाश के लिए खोज और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि घटना की जांच पूरी होने के बाद इसके बारे में और जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
तेल टैंकर में भीषण आग
इससे पहले ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक बड़े तेल टैंकर में विस्फोट और आग लगने की जानकारी दी थी।
आईआरजीसी की आधिकारिक समाचार सेवा सेपाह न्यूज के अनुसार, 'एल गैया' नाम का सुपर ऑयल टैंकर जलमार्ग के दक्षिणी हिस्से में एक प्रतिबंधित मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान उसके नौसैनिक बारूदी सुरंगों की चपेट में आने का दावा किया गया, जिसके बाद विस्फोट हुआ।
नौसेना के मुताबिक, आग पर काबू पाने की कोशिश की गई, लेकिन हालात नियंत्रण में नहीं आ सके और पूरा जहाज आग की लपटों में घिर गया। समुद्री घटनाओं और बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत पर सख्त रुख आने वाले दिनों में कूटनीतिक गतिविधियों के लिए अहम माना जा रहा है।