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2030 में पेट्रोल-डीजल की 56 लाख गाड़ियां बिकेंगी

2030 में पेट्रोल-डीजल की 56 लाख गाड़ियां बिकेंगी

फ्लैक्स फ्यूल इंडिया में रिवॉल्यूशन ला सकता है, टोयोटा कंट्री हेड विक्रम गुलाटी का इंटरव्यू


आने वाले 5-6 साल में देश किस तरफ जाएगा? इलेक्ट्रिक व्हीकल, फ्लैक्स फ्यूल या हाइड्रोजन व्हीकल… टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी का कहना है कि भारत अभी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर पूरा फोकस कर रहा है, इसके बावजूद साल 2030 तक पेट्रोल-डीजल व्हीकल्स की बिक्री अभी के 40 लाख से बढ़कर 56 लाख हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि फ्लैक्स फ्यूल को लेकर अगर सरकार कोई पॉलिसी लाती है तो इससे कार्बन एमिशन के मामले में इंडिया में ट्रू रिवॉल्यूशन आ सकता है। वहीं उन्होंने टोयोटा के प्योर इलेक्ट्रिक व्हीकल और हाइड्रोजन व्हीकल को बाजार में कब तक उतारा जाएगा इसे लेकर भी बात की।

पढ़िए उनका पूरा इंटरव्यू...

1. टोयोटा की पहली हाइड्रोजन कार इंडियन कस्टमर्स को कब तक मिल सकती है?
टोयोटा ने 1996 में सबसे पहली इलेक्ट्रिक कार इंट्रोड्यूज की थी। वो अभी तक दुनियाभर में 2.2 करोड़ EV बेच चुकी है। इनमें से ज्यादातर EV… हाइब्रिड है।

साल 2014 में हमने अपनी पहली हाइड्रोजन कार मिराई को कॉमर्शियली इंट्रोड्यूज किया था। सेकेंड जनरेशन मिराई आज के समय में कैलिफोर्निया, चाइना, मिडिल ईस्ट सहित अन्य मार्केट में यूज हो रही है। इंडिया में भी हमने इसे पायलट प्रोजेक्ट के तहत इंट्रोड्यूज किया है।

इंडिया में इसे लाने का लक्ष्य यह था कि भारत में भी हाइड्रोजन का प्रॉमिसिंग सिनारियो है। हाइड्रोजन रिन्यूएबल एनर्जी के साथ जनरेट किया जा सकता है। हम चाहते है कि इसका डेटा जनरेट करके देखा जाए कि इंडियन कंडीशन के लिए हाइड्रोजन कार में क्या बदलाव लाने होंगे।

टोयोटा ने दुनिया का पहला BS6 कंप्लायंस इलेक्ट्रिफाइड फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल भी अनवील किया है। ये प्रोटेटाइप है और अंडरडेवलपमेंट फेज में है। इसकी यूनीक बात यह है कि व्हीकल हाइब्रिड की तरह इलेक्ट्रिफाइड है, लेकिन 100% तक फ्लेक्स फ्यूल से चल सकता है।

दुनिया के मार्केट की लोकल कंडीशन अलग-अलग होती है। वहां का एनर्जी मिक्स, कस्टमर चॉइस, कस्टमर वैल्यू प्रपोजिशन, इंफ्रास्ट्रक्चर रेडिनेस अलग है। टोयोटा अलग-अलग टेक्नोलॉजी को मार्केट में उस हिसाब से लाता है कि शॉर्टेस्ट टाइम में मैक्सिमम इंपैक्ट हो।

हम अलग-अलग टेक्नोलॉजी को एक्सप्लोर कर रहे हैं। आगे भी ऐसा करना जारी रखेंग। कस्टमर और सोसाइटी की नीड के हिसाब से उचित टाइम पर इंडिया में भी इसे इंट्रोड्यूज करेंगे। 2. हाइड्रोजन के मुकाबले ईवी को लेकर दुनिया में ज्यादा बात हो रही है, ऐसा क्यों?
दोनों ही टेक्नोलॉजी एन्वॉयर्नमेंट के लिए अच्छी है। ये यूटिलाइजेशन के हिसाब से कस्टमर को अट्रैक्ट कर सकती है। जैसे ईवी शॉर्ट डिस्टेंस के लिए अच्छी है। इंट्रा सिटी टैक्सी ऑपरेशन के लिए यह बेहतर है। रिटर्न ऑफ इन्वेस्टमेंट भी जल्दी आ जाता है।

वहीं ट्रक जैसे बड़े व्हीकल जो इंटरस्टेट चलते हैं उनमें चार्जिंग की दिक्कत आएगी। बार-बार व्हीकल चार्ज करना आसान नहीं होगा। बहुत बड़ी बैटरी भी व्हीकल में नहीं लगाई जा सकती। इसलिए रेंज ज्यादा नहीं होगी। ऐसे में लंबी दूरी के लिए हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी ज्यादा बेहतर है।

दुनिया में दोनों टेक्नोलॉजी पर काम चल रहा है। ये जरूर है कि इवी की चर्चा हाइड्रोजन से ज्यादा हो रही है। इलेक्ट्रिक व्हीकल को लोग 30 साल से इंट्रोड्यूज करने की कोशिश कर रहे हैं। कई सारे प्रोडक्ट भी आ गए है। ऐसे में लाजमी है कि इसकी चर्चा ज्यादा होगी।

लेकिन अब हाइड्रोन भी पिक कर रहा है। यूएस, चाइना, यूरोप में... इसमें भी जब ट्रेन, शिप, ट्रकिंग में ये टेक्नोलॉजी आने लगेगी तो और चर्चा होगी। भारत सरकार ने 19,000 करोड़ रुपए का हाइड्रोजन मिशन लॉन्च किया है। नए प्रोडक्ट आएंगे तो.. ये भी अट्रैक्ट करेगी।

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