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राहुल के बाद प्रियंका का हमला, SIR पर BJP को घेरा

राहुल के बाद प्रियंका का हमला, SIR पर BJP को घेरा

वायनाड/नई दिल्ली। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने शुक्रवार को भाजपा पर निशाना साधा। वायनाड में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने भाजपा की उस प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया, जिसमें कांग्रेस पर चुनाव हारने की स्थिति में चुनावी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाने का आरोप लगाया गया था। प्रियंका ने इसे खारिज करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर तथ्य और सबूत सार्वजनिक रूप से सामने रखे जा चुके हैं।

प्रियंका ने कहा कि उनके भाई और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कई प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे से जुड़े दस्तावेज और आंकड़े सामने रख चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि SIR की प्रक्रिया के दौरान करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। हालांकि, यह संख्या और इससे जुड़े आरोप कांग्रेस नेताओं के दावे हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं पेश किया जा सकता।

भाजपा के बयान पर प्रियंका का पलटवार

प्रियंका गांधी ने भाजपा से ऐसे बयानों के बजाय उठाए गए सवालों का जवाब देने को कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि चुनावी प्रक्रिया में किसी तरह का हस्तक्षेप हुआ है और किसी राजनीतिक नेतृत्व ने चुनाव आयोग पर ऐसा करने के लिए दबाव डाला है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव में कथित गड़बड़ी को लेकर सवाल उठाना केवल राजनीतिक आरोप का विषय नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। प्रियंका ने अपने बयान में चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह के हस्तक्षेप को देश और संविधान के लिए गंभीर बताया।

राहुल गांधी ने भी CEC पर साधा था निशाना

प्रियंका का बयान राहुल गांधी की 24 सितंबर की प्रेस कॉन्फ्रेंस के एक दिन बाद आया है। राहुल गांधी ने SIR को लेकर चुनाव आयोग में कथित मतभेदों से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। उन्होंने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे।

राहुल गांधी ने यह भी दावा किया था कि यदि वोट की प्रक्रिया प्रभावित होती है तो उसके आधार पर चुनी गई संसद और उससे जुड़े फैसलों की वैधता पर भी सवाल उठता है। उन्होंने SIR विवाद को ‘वोट चोरी’ और ‘कानून चोरी’ से जोड़ते हुए अपनी बात रखी थी।

SIR को लेकर सामने आया चुनाव आयोग का पक्ष

इस विवाद की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े फैसलों को लेकर मतभेद की मीडिया रिपोर्ट सामने आई थी। रिपोर्टों में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। राहुल गांधी ने इन्हीं रिपोर्टों को अपने आरोपों का आधार बनाया।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से यह कहा गया है कि आयोग के फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए जाते हैं। ऐसे में SIR को लेकर विपक्ष के आरोपों और चुनाव आयोग के पक्ष के बीच स्पष्ट अंतर है। विवाद से जुड़े दावों की अंतिम स्थिति संबंधित दस्तावेजों और न्यायिक या आधिकारिक जांच के आधार पर ही तय होगी।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

SIR और मतदाता सूची का मुद्दा अब कांग्रेस और भाजपा के बीच बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। कांग्रेस नेता चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलावों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक दावे के तौर पर खारिज कर रही है। इसी बीच चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके फैसलों को लेकर सार्वजनिक बहस तेज हो गई है।

 

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