समुद्र की संपदा को तकनीक से नई दिशा दे रहा CIFT
मछली पकड़ने से संरक्षण, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन तक शोध; टिकाऊ मत्स्यन और समुद्री खाद्य सुरक्षा पर जोर
विशाखापट्टनम। समुद्र में मौजूद मछली और अन्य जलीय संसाधनों का बेहतर और टिकाऊ उपयोग करने की दिशा में ICAR–केंद्रीय मात्स्यिकी प्रौद्योगिकी संस्थान (CIFT), विशाखापट्टनम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संस्थान का अनुसंधान केवल मछली पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि मत्स्यन की आधुनिक तकनीक से लेकर मछली के संरक्षण, प्रसंस्करण, गुणवत्ता जांच और वैल्यू एडेड उत्पाद तैयार करने तक पूरी श्रृंखला पर केंद्रित है। CIFT में आधुनिक फिशिंग गियर, जाल की डिजाइनिंग, ट्रॉलिंग तकनीक, मत्स्यन नौकाओं और उपकरणों को बेहतर बनाने पर शोध किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना है, जिससे कम ईंधन और ऊर्जा में प्रभावी मत्स्यन किया जा सके तथा समुद्री संसाधनों का वैज्ञानिक और टिकाऊ तरीके से उपयोग हो।
प्रशिक्षण और स्किल डेवलपमेंट से तकनीक का प्रसार
CIFT की विकसित तकनीकों को प्रयोगशाला तक सीमित रखने के बजाय मछुआरों, उद्यमियों, विद्यार्थियों और समुद्री खाद्य उद्योग तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से आधुनिक मत्स्यन तकनीक, खाद्य प्रसंस्करण, गुणवत्ता और समुद्री खाद्य उत्पादों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
समुद्र की संपदा का वैज्ञानिक और टिकाऊ उपयोग
विशाखापट्टनम जैसे तटीय शहर में CIFT की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां समुद्री मत्स्य संसाधनों और उनसे जुड़े उद्योगों की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। संस्थान का शोध समुद्र से प्राप्त संसाधनों को अधिक सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और मूल्यवान बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
मछली पकड़ने से लेकर उसकी गुणवत्ता जांच, संरक्षण, प्रोसेसिंग और बाजार तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में विज्ञान और तकनीक को जोड़कर CIFT समुद्री अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का प्रयास कर रहा है।
मछुआरों की मेहनत को तकनीक से मिल रहा सहारा समुद्र में मछली पकड़ना मौसम, समुद्री परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करता है। ऐसे में आधुनिक तकनीक मछुआरों के लिए मत्स्यन को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने में मददगार हो सकती है। CIFT द्वारा विकसित तकनीकों में नौकाओं की कार्यक्षमता, मछली पकड़ने के उपकरणों की डिजाइन और ईंधन दक्षता जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है। संस्थान का प्रयास है कि मत्स्यन तकनीक ऐसी हो जिससे समुद्री पारिस्थितिकी पर अनावश्यक दबाव न पड़े और उपलब्ध संसाधनों का लंबे समय तक उपयोग किया जा सके।
मछली की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा पर विशेष फोकस CIFT के अनुसंधान का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र मछली की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा है। समुद्र से मछली पकड़ने के बाद यदि उचित तापमान, स्वच्छता और संरक्षण व्यवस्था नहीं हो तो उसकी गुणवत्ता तेजी से प्रभावित हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए मछली को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आधुनिक संरक्षण एवं प्रोसेसिंग तकनीकों पर शोध किया जाता है। इसके साथ ही मछली से विभिन्न वैल्यू-एडेड उत्पाद तैयार करने की तकनीक विकसित की जा रही है। इससे समुद्री खाद्य पदार्थों की उपयोगिता बढ़ाने के साथ मछुआरों, प्रसंस्करण इकाइयों और समुद्री खाद्य उद्योग के लिए अतिरिक्त आर्थिक अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
लैब से समुद्र तक पहुंच रही तकनीक CIFT में माइक्रोबायोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री और न्यूट्रिशन जैसे क्षेत्रों में भी अनुसंधान किया जाता है। मछली और समुद्री खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता, पोषण, खाद्य सुरक्षा और जैव-सक्रिय तत्वों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर वैज्ञानिक अध्ययन किए जाते हैं। संस्थान जलीय जीवों से उपयोगी बायोएक्टिव कंपाउंड्स प्राप्त करने, विभिन्न जलीय प्रजातियों की पहचान तथा जीवित जलीय जीवों के सुरक्षित परिवहन से संबंधित तकनीकों पर भी काम करता है।
समुद्री संसाधनों से बढ़ेगा आर्थिक मूल्य मछली को केवल एक खाद्य पदार्थ के रूप में देखने के बजाय उससे विभिन्न प्रकार के उत्पाद विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से समुद्री संसाधनों का बेहतर उपयोग कर उनके आर्थिक मूल्य में वृद्धि की जा सकती है। इससे मत्स्य क्षेत्र से जुड़े मछुआरों, छोटे उद्यमियों और समुद्री खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को लाभ मिलने की संभावनाएं बढ़ती हैं।