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मेक इन इंडिया से रक्षा उत्पादन को नई ताकत

मेक इन इंडिया से रक्षा उत्पादन को नई ताकत

नई दिल्ली। मेक इन इंडिया के 12 साल पूरे होने के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत के विनिर्माण और रक्षा उत्पादन में आए बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह पहल अब केवल देश में उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए भी तैयार कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विनिर्माण नीति को ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड’ की सोच के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

राजनाथ सिंह के अनुसार, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का असर जमीन, समुद्र और आसमान तीनों क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। उन्होंने स्वदेशी सैन्य प्लेटफॉर्म का जिक्र करते हुए कहा कि तेजस लड़ाकू विमान और प्रचंड हेलिकॉप्टर भारतीय एयरोस्पेस क्षमता के उदाहरण हैं। समुद्री क्षेत्र में स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत और थल क्षेत्र में अर्जुन टैंक तथा धनुष तोप को उन्होंने घरेलू रक्षा उत्पादन की क्षमता से जोड़ा।

स्वदेशी तकनीक पर बढ़ता जोर

रक्षा मंत्री ने आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस जैसे प्लेटफॉर्म का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत रक्षा तकनीक के क्षेत्र में नई क्षमताएं विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, आधुनिक युद्ध में तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ी है और भारत ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, अंतरिक्ष और क्वांटम तकनीक जैसे क्षेत्रों पर भी काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप, एमएसएमई और उद्योगों की भागीदारी बढ़ाई जा रही है। सरकार ने देश के अलग-अलग हिस्सों में रक्षा विनिर्माण को गति देने के लिए डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर भी विकसित किए हैं। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में विकसित इन कॉरिडोर में निवेश और उत्पादन से जुड़ी गतिविधियां आगे बढ़ रही हैं।

घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने की कोशिश

राजनाथ सिंह ने घरेलू रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने सृजन डिफेंस इक्विपमेंट एम्पावरमेंट प्लेटफॉर्म का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके जरिए रक्षा निर्माता, एमएसएमई और विक्रेताओं को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जा रहा है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 तक सृजन डिफेंस इक्विपमेंट एम्पावरमेंट प्लेटफॉर्म पर 41 हजार से अधिक वेंडर्स और 2.7 लाख से अधिक उत्पाद सूचीबद्ध थे। इसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में घरेलू स्रोतों की पहचान बढ़ाना और देश में विकसित उत्पादों तथा कंपनियों को रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ना है।

रक्षा उत्पादन में बढ़ा घरेलू योगदान

सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। 2014-15 में यह आंकड़ा करीब 46,429 करोड़ रुपये था। इसी अवधि में रक्षा निर्यात भी बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंचा और भारतीय रक्षा उत्पाद 80 से अधिक देशों तक निर्यात किए जा रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की प्राथमिकता केवल मौजूदा जरूरतों को पूरा करना नहीं है, बल्कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए भी तकनीकी और औद्योगिक क्षमता तैयार करना है। इसी दिशा में स्वदेशी अनुसंधान, उत्पादन, निजी उद्योग, स्टार्टअप और एमएसएमई की भागीदारी को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

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