नवरात्रि में संसद का विशेष सत्र? महिला आरक्षण और परिसीमन पर फिर मंथन
नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक केंद्र सरकार नवरात्रि के दौरान संसद की विशेष बैठक बुलाने के विकल्प पर विचार कर रही है। संभावित सत्र में महिला आरक्षण को लागू करने और परिसीमन से जुड़े विधायी प्रस्तावों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है।
नवरात्रि का पर्व 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर तक चलेगा। सूत्रों के अनुसार, त्योहार के कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए 11 से 15 अक्टूबर के बीच संसद की विशेष बैठक आयोजित करने का विकल्प सामने है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तारीख या सत्र को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
विपक्ष से भी संपर्क, समय पर फैसला बाकी
विशेष सत्र की संभावित योजना को लेकर सरकार की ओर से विपक्षी दलों से संपर्क किए जाने की बात भी सामने आई है। इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के कार्यालय की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से बातचीत किए जाने की रिपोर्ट आई थी।
हालांकि, विशेष सत्र कब बुलाया जाएगा और महिला आरक्षण को लागू करने के लिए किस विधायी रास्ते को अपनाया जाएगा, इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। संसद का मॉनसून सत्र समाप्त होने के बाद दोनों सदनों को औपचारिक रूप से स्थगित किए जाने में देरी ने भी विशेष सत्र की अटकलों को हवा दी है।
महिला आरक्षण को लेकर क्या है मामला?
महिला आरक्षण से जुड़ा नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संसद से पारित हुआ था। कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में करीब एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है। इसके लागू होने को जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया था।
सरकार इस व्यवस्था को जल्द लागू करने के लिए परिसीमन से जुड़े प्रावधानों में बदलाव की दिशा में पहले भी कदम उठा चुकी है। अप्रैल 2026 में इस मुद्दे पर संसद में विशेष सत्र हुआ था, लेकिन संबंधित संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका था।
परिसीमन पर फिर बन सकती है तस्वीर
महिला आरक्षण के साथ परिसीमन का मुद्दा भी संभावित विशेष सत्र के एजेंडे में महत्वपूर्ण हो सकता है। अप्रैल में पेश प्रस्तावों में लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 तक करने और परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से जुड़े प्रावधान शामिल थे। हालांकि, उस समय विधेयक को लोकसभा में आवश्यक समर्थन नहीं मिल पाया था।
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की अपनी आपत्तियां हैं। खास तौर पर दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर संभावित प्रभाव और महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। इसलिए यदि विशेष सत्र बुलाया जाता है, तो चर्चा केवल महिला आरक्षण तक सीमित रहने के बजाय परिसीमन के व्यापक मुद्दे पर भी केंद्रित हो सकती है।
2027 के विधानसभा चुनावों से भी जोड़ी जा रही चर्चा
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि नवरात्रि के दौरान महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे को संसद में उठाने का राजनीतिक संदेश हो सकता है। कुछ एनडीए सांसदों ने इसे 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश, पंजाब और अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले महिला मतदाताओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया है। यह राजनीतिक दलों और नेताओं की राय है; विशेष सत्र का आधिकारिक एजेंडा अभी घोषित नहीं हुआ है।
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि विशेष सत्र की संभावना पर चर्चा चल रही है, लेकिन अंतिम फैसला बाकी है। यदि सरकार आगे बढ़ती है तो अक्टूबर के शुरुआती दिनों में सत्र की औपचारिक घोषणा किए जाने की संभावना जताई गई है।